ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रंप के दावे पर सवाल (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका में सामने आए नए सरकारी दस्तावेजों ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें वे कहते रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीजफायर करवाने में मध्यस्थता की थी। इन दस्तावेजों में ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता कि भारत ने अमेरिका से इस मुद्दे पर कोई मध्यस्थता मांगी हो।
अमेरिका के Foreign Agents Registration Act (FARA) के तहत दाखिल किए गए रिकॉर्डबताते हैं कि भारत सरकार की ओर से ऐसी किसी बातचीत या मांग का जिक्र नहीं है, जिसमें अमेरिका से युद्धविराम या तीसरे पक्ष की भूमिका मांगी गई हो। ये दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।
ये खुलासे ऐसे समय पर आए हैं जब ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके हैं कि मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाक तनाव को खत्म कराने में अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई थी। भारत सरकार पहले ही इन दावों को खारिज कर चुकी है।
FARA दस्तावेज क्या बताते हैं?
FARA के तहत दाखिल यह तीन पन्नों की फाइल अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच की गतिविधियों का ब्योरा देती है। इसमें वॉशिंगटन स्थित लॉबिंग फर्म SHW Partners LLC की भूमिका दर्ज है, जिसके प्रमुख जेसन मिलर हैंजो ट्रंप के पूर्व सलाहकार रह चुके हैं।
यह फर्म 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के दो दिन बाद भारतीय दूतावास की ओर से नियुक्त की गई थी। इसका उद्देश्य नियमित कूटनीतिक कामों में मदद करना था, जैसे उच्चस्तरीय यात्राओं की तैयारी, व्यापार वार्ताएं और अमेरिकी एजेंसियों के साथ तालमेल। दस्तावेजों में कॉल, ईमेल और बैठकों की सूची है, लेकिन इनमें कहीं भी सीजफायर, मध्यस्थता या भारत-पाक संघर्ष में अमेरिकी दखल का कोई जिक्र नहीं है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की प्राथमिकताएं
- अमेरिकी मीडिया में ऑपरेशन से जुड़ी खबरों को संभालना
- भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं की स्थिति पर नजर रखना
- अमेरिकी दौरे पर आए भारतीय सांसदों और मंत्रियों की बैठकों की व्यवस्था करना
कुछ एंट्री में यह भी दर्ज है कि भारतीय राजदूत अमेरिकी मीडिया से बातचीत के लिए तैयार थे। लेकिन किसी भी जगह यह नहीं दिखता कि भारत ने अमेरिका से पाकिस्तान के साथ युद्धविराम कराने को कहा हो। यह तस्वीर ट्रंप के उस सार्वजनिक बयान से मेल नहीं खाती, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत करवाई।
भारत का रुख
डोनल्ड ट्रंप अब तक 65 से ज्यादा बार यह दावा कर चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीजफायर अमेरिका की मध्यस्थता से हुआ। भारत ने हर बार इसे गलत बताया है।
भारत का साफ कहना है कि सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व की ओर से आया था और यह बातचीत स्थापित सैन्य चैनलों के जरिए हुई थी, न कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से।
नई दिल्ली के अधिकारियों का कहना है कि FARA फाइलिंग अमेरिका में एक सामान्य और कानूनी प्रक्रिया है। एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने कहा, “अमेरिका में लॉबिंग पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया है। ज्यादातर देश ऐसा करते हैं। इसमें कुछ भी गुप्त नहीं है।“
लॉबिंग फर्म का असली काम क्या था?
- अमेरिकी विदेश मंत्रालय और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से संपर्क
- भारतीय राजदूत और राजनयिकों की बैठकों में मदद
- 2025 तक व्यापार और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर सहयोग
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