आखिर है क्या कनपटी पर लगी ये मशीन (Picture Courtesy: Instagram)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में जोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल का एक पॉडकास्ट वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उनके कान के पास लगी एक छोटी सी डिवाइस ने लोगों के बीच काफी उत्सुकता पैदा की।
सोशल मीडिया पर भी हर कोई यही जानना चाह रहा था कि आखिर उन्होंने अपने कान के पास क्या लगाया हुआ है। अगर आपके मन में भी यह सवाल है, तो आपको बता दें इसे टेंपल कहा जाता है। आइए जानें यह काम कैसे करता है।
क्या है यह \“टेम्पल\“ डिवाइस?
\“टेम्पल\“ एक प्रयोगात्मक वियरेबल डिवाइस है, जिसे खासतौर से दिमाग में सेरेब्रल ब्लड फ्लो की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। वर्तमान में उपलब्ध स्मार्टवॉच या रिंग्स आपके दिल की गति और ऑक्सीजन लेवल को तो माप सकती हैं, लेकिन दिमाग के अंदर क्या चल रहा है, यह बताने वाले गैजेट्स अभी भी विकास के चरण में हैं। टेम्पल इसी कमी को पूरा करने की एक कोशिश है।
यह काम कैसे करती है?
आमतौर पर दिमाग में ब्लड फ्लो को मापने के लिए अस्पतालों में बड़े उपकरणों जैसे ट्रांसक्रेनियल डॉप्लर (TCD) या नियर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी (NIRS) का इस्तेमाल किया जाता है। टेम्पल डिवाइस इन्हीं प्रिंसपल पर बना एक छोटा और पोर्टेबल डिवाइस है।
- सेंसर और लाइट- यह डिवाइस लाइट-बेस्ड सेंसर का इस्तेमाल करती है जो त्वचा के नीचे की आर्टरीज से सिग्नल पकड़ते हैं।
- डाटा कलेक्शन- पारंपरिक मशीनों के विपरीत, इसे घंटों या दिनों तक पहना जा सकता है, जिससे यह पता चलता है कि काम करते समय, तनाव में या सोते समय दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन में कैसे बदलाव आता है।
- एल्गोरिदम का जादू- डिवाइस से मिलने वाला रॉ डाटा क्लाउड पर जाता है, जहां एल्गोरिदम यह विश्लेषण करते हैं कि आपके फोकस, याददाश्त और मानसिक थकान का ब्लड फ्लो से क्या कनेक्शन है।
\“ग्रैविटी एजिंग हाइपोथेसिस\“
दीपिंदर गोयल और उनकी टीम इस डिवाइस के जरिए \“ग्रैविटी एजिंग हाइपोथेसिस\“ पर शोध कर रहे हैं। इसके पीछे का विचार यह है कि जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, पृथ्वी की ग्रैविटी हमारे शरीर, खासकर दिमाग तक रक्त पहुंचाने की क्षमता को प्रभावित करता है।
अगर हम लंबे समय तक यह डाटा इकट्ठा कर सकें कि अलग-अलग पोस्चर में दिमाग को कितना खून मिल रहा है, तो भविष्य में हम अल्जाइमर, डिमेंशिया और मानसिक एकाग्रता में कमी जैसी समस्याओं को समय से पहले पहचान सकते हैं और शायद उन्हें धीमा भी कर सकते हैं।
न्यूरो-टेक का भविष्य
फिलहाल, टेम्पल जैसी डिवाइसेस मुख्य रूप से शोध और \“बायोहैकिंग\“ के शौकीनों तक सीमित हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि दिमाग की सेहत को ट्रैक करना आने वाले समय में उतना ही सामान्य हो जाएगा जितना आज स्टेप्स काउंट करना है। हालांकि, इन डिवाइसेस की मेडिकल सटीकता अभी भी बहस का विषय है और इन्हें क्लिनिकल ग्रेड का दर्जा मिलना बाकी है।
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