राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य के सभी जिलों में फोरेंसिक वाहन की सुविधा के बाद अब सभी एक दर्जन पुलिस रेंज में स्थायी फोरेंसिक लैब शुरू करने की तैयारी है। वर्तमान में पटना में विधि-विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के साथ मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में स्थायी क्षेत्रीय एफएसएल है। मार्च तक तीन से चार नई एफएसएल शुरू करने की तैयारी है।
नए लैब शुरू होने से एफएसल जांच में तेजी आएगी। अपराध अनुसंधान विभाग (सीआइडी) ने राज्य के क्षेत्रीय एफएसएल और चलंत फोरेंसिक इकाइयों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। रिक्त पदों के विरुद्ध वरीय वैज्ञानिक सहायक के 100 पदों और सहायक निदेशक के 89 पदों पर अस्थायी रूप से संविदा के आधार पर नियोजन किया जा रहा है।
इसको लेकर डीजीपी द्वारा गठित त्रिसदस्यीय बोर्ड के द्वारा अभ्यर्थियों का चयन किया गया है, जिनके सत्यापन एवं चिकित्सा जांच की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हो गई है। जल्द ही अंतिम चयन सूची जारी होने की उम्मीद है।
वर्तमान में राज्य में प्रतिदिन औसत 250 एफएसएल जांच के मामले आते हैं। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार, पुलिस के एक दर्जन रेंज है। इनमें चार में स्थायी लैब हैं। अन्य आठ पुलिस रेंज में भी स्थायी फोरेंसिक लैब के निर्माण की प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं। पूर्णिया में तो भवन निर्माण पूरा हो चुका है और उपकरण लगाए जाने का काम चल रहा है।
इस एफएसएल के सबसे पहले शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा दरभंगा, रोहतास, मुंगेर, सहरसा, बेतिया, छपरा और गया में भी एफएसएल भवन निर्माण का काम अंतिम चरण में हैं। इनमें से तीन एफएसएल को मार्च तक शुरू किया जा सकता है।
सभी जिलों में हैं अभी चलंत फोरेंसिक वाहन की सुविधा:
वर्तमान में राज्य के सभी जिलों में चलंत फोरेंसिक वाहन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। पिछले माह ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 34 नए चलंत फोरेंसिक वाहन को हरी झंडी दिखाई थी। इसके पहले भी 17 फोरेंसिक वाहन उपलब्ध थे। इस तरह अभी 51 मोबाइल वैन हैं।
इनमें सर्वाधिक मामलों वाले छह जिलों- पटना, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, गयाजी, भागलपुर और मधुबनी में दो-दो चलंत फोरेंसिक वाहन की सुविधा दी गई है। बाकी जिलों में एक-एक वाहन उपलब्ध कराया गया है। |
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