हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है एसएमसी शिक्षकों के लिए निर्धारित सीमित प्रत्यक्ष भर्ती कोटा के तहत की गई कोई भी नियुक्ति रिट याचिका के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी। कोर्ट ने कहा कि ऐसी नियुक्ति किसी भी नियुक्त व्यक्ति के पक्ष में कोई समानता नहीं रखेगी और आदेश दिए कि ऐसी शर्त नियुक्ति आदेश में अधिसूचित की जाए।
यह आदेश शिक्षा विभाग में विभिन्न संकायों के 1427 पदों को भरने के लिए हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा एसएमसी शिक्षकों के लिए आयोजित किए जा रहे एलडीआर टेस्ट को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के पश्चात जारी किए गए हैं।
11 मार्च को होगी अगली सुनवाई
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने मामले पर अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित करने के आदेश दिए। प्रार्थियों ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद शिक्षकों की नियमित नियुक्ति के बजाय स्कूल शिक्षा बोर्ड के माध्यम से 20 दिसंबर को जारी अधिसूचना के तहत 1427 शिक्षकों के पदों को भरने के लिए लिमिटेड डायरेक्ट रिक्रूटमेंट टेस्ट का आयोजन किया जा रहा है।
इस टेस्ट में हिस्सा लेने के लिए केवल 2012 की एसएमसी पॉलिसी के तहत नियुक्त एसएमसी शिक्षकों को पात्र बनाया गया है। न्यूनतम सेवा की अवधि 5 वर्ष रखी गई है और परीक्षा की तिथि 22 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है।
सीधे तौर पर नियमित भर्ती की मांग
प्रार्थियों ने मांग की है कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने से रोका जाए और शिक्षकों की नियमित भर्तियां सीधे तौर पर करवाने के आदेश दिए जाएं। अगर राज्य सरकार को इस प्रक्रिया को पूरा करने दिया जाता है तो इससे बेरोजगार शिक्षकों की नियुक्ति पर सीधा असर पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने आश्वासन पर दी थी राहत
उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट ने एसएमसी शिक्षकों को हटाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद प्रभावित शिक्षकों और सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस आश्वासन के बाद याचिका का निपटारा किया था, जिसके अनुसार भविष्य में अस्थायी शिक्षकों को न तो भर्ती किया जाएगा और न ही एसएमसी शिक्षकों को नियमित किया जाएगा।
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