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सावधान! पेयजल के गड़बड़ाते मानक कहीं बिगाड़ न दे आपका स्वास्थ्य; जम्मू-कश्मीर में भूजल की गुणवत्ता खतरे में

cy520520 4 day(s) ago views 416
  

जम्मू-कश्मीर में समय रहते ध्यान न देने पर इंदौर जैसी घटना की पुनरावृत्ति हो सकती है।



अंचल सिंह, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में भूजल की गुणवत्ता ज्यादा खराब तो नहीं लेकिन घरों तक पहुंचते-पहुंचते यह पानी दूषित हो रहा है। इसका पीएच स्तर बढ़ने के साथ अन्य मानक भी गड़बड़ा रहे हैं। कुल मिलाकर प्रदेश में भी पेयजल की गुणवत्ता खतरे के निशान को छू रही है। समय रहते नहीं जागे तो देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की घटना जैसी पुनरावृत्ति हो सकती है।

जम्मू-कश्मीर में पानी की गुणवत्ता पर क्षेत्रीय भूमि व्यवस्था में बदलाव, गैर योजनाबद्ध शहरीकरण, जंगलों की कटाई और जंगल का खराब होना, पर्यटन से जुड़ी गतिविधयों, कीटनाशक और केमिकल फर्टिलाइजर के लापरवाही से इस्तेमाल का काफी असर पड़ा है।

यही कारण है कि पानी के उठाए जा रहे सैम्पलों में थोड़ी गड़बड़ी है। मुख्यता: देश भर में चौदह तरह के मानक तय हैं जिनकी जांच कर पानी की गुणवत्ता को परखा जाता है। पानी में भिन्न रसायन रहते हैं जो स्वास्थ्य के लिए घातक साबित होते हैं।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग में उन्नत अनुसंधान के अंतर्राष्ट्रीय जर्नल के वॉल्यूम 11 में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार जम्मू जिले में पेयजल में कुछ रसायनों का स्तर बढ़ा हुआ है जो सावधानी न बरतने पर सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसमें वर्ष 2015, 2017 और 2020 में जुटाए गए आंकड़ों की तुलना की गई है।
37.6 प्रतिशत सैंपल में कार्बोनेट टाइप ज़्यादा

जम्मू और कश्मीर के कम गहरे ग्राउंडवाटर से इकट्ठा किए गए ज़्यादातर सैंपल एल्कलाइन नेचर के होते हैं। pH वैल्यू 6.15 से 9.04 के बीच होती है। 37.6 प्रतिशत सैंपल में कार्बोनेट टाइप ज़्यादा होता है। फ्लोराइड एलिमेंट इंसान के शरीर के लिए कम मात्रा में जरूरी होता है लेकिन ज़्यादा मात्रा में यह खतरनाक होता है।

93.2 प्रतिशत सैंपल में फ्लोराइड आयन का कंसंट्रेशन 1.0 mg/l की स्वीकार्य सीमा के अंदर है। वहीं 88.8 प्रतिशत सैंपल में नाइट्रेट कंसंट्रेशन कम है लेकिन 11.2 प्रतिशत सैंपल में ज्यादा वैल्यू भी रिपोर्ट की गई है। फर्टिलाइजर का ज्यादा इस्तेमाल, ऑर्गेनिक नाइट्रोजन का बैक्टीरियल नाइट्रिफिकेशन, जानवरों और इंसानों के वेस्ट से रिसाव और एटमोस्फेरिक इनपुट ग्राउंडवॉटर में नाइट्रेट प्रदूषण के सबसे संभावित कारण हैं।

जम्मू-कश्मीर में सभी सैंपल में सल्फेट कंसंट्रेशन 2.8 से 181.5 mg/l तक अलग-अलग होता है और सभी जगहों पर यह बीआईएस द्वारा पीने के पानी के लिए तय की गई स्वीकार्य सीमा (400 mg/l) के अंदर है।
बीआईएस द्वारा तय अधिकतम स्वीकार्य सीमा

उधर पानी की हार्डनेस की बात करें तो यह ग्राउंडवॉटर में पाए जाने वाले कार्बोनेट, बाइकार्बोनेट, सल्फेट और दूसरे कैल्शियम और मैग्नीशियम मिनरल की वजह से हो सकता है। हार्डनेस के क्लासिफिकेशन के अनुसार जांचे गए 200 सैंपल में से 175 सैंपल हार्ड ग्रुप (200-600 mg/l) में आते हैं जबकि 3 सैंपल बहुत हार्ड (600 mg/l से ज़्यादा) के तौर पर क्लासिफाई किए गए हैं।

70 सैंपल 200 mg/l से कम हार्डनेस, सॉफ्ट कैटेगरी में पाए गए। बीआईएस मापदंड के अनुसार पीने के पानी में कुल हार्डनेस के लिए 200 और 600 mg/l स्वीकार्य है। प्रदेश में कैल्शियम कंसंट्रेशन 10.2 से 158 mg/l तक होता है। सभी कुओं में कंसंट्रेशन पीने के पानी के लिए बीआईएस द्वारा तय अधिकतम स्वीकार्य सीमा 200 mg/l तक है।

यह नेचुरल पानी में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले सब्सटेंस में से एक है। न्यूरोलॉजिकल और मस्कुलर सिस्टम, हार्ट और ब्लड क्लॉटिंग सभी कैल्शियम पर डिपेंड करते हैं। ज्यादा कैल्शियम कंटेंट से किडनी, ब्लैडर और दूसरी पथरी बन सकती है। साथ ही यूरिनरी ट्रैक्ट में जलन भी हो सकती है।
जांच आर्दश माप स्वास्थ्य संबंधी जोखिम

1. रंग (color) 83 हेजन कीटाणु या रसायन न छुप सकते हैं। कपड़े और बर्तन दागदार हो जाते हैं।
2. सुगंध (Smell) बिना गंध (बिलकुल साफ) जैविक या रासायनिक गंदगी की निशानी।
3. गंदलापन (Turbidity) 4. पीएच 6.5–8.5 कम pH धातु को घोलता है; ज़्यादा pH से त्वचा जलती है, स्वाद कड़वा लगता है
5. टीडीएस ; किडनी पर असर पड़ता है, पाइपों में जमाव होता है
6. कठोरता (Hardness – कैल्शियम और मैग्नीशियम) ~200 mg/L (≤600 mg/L स्वीकार्य) साबुन झाग नहीं बनाता; पाइपों में स्केल जमता है; बहुत मुलायम पानी पाइप को काटता है
7. क्लोराइड (Chloride) ; पाइप जल्दी खराब होते हैं; सोडियम से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है
8. फ्लोराइड (Fluoride) 9. नाइट्रेट (Nitrate) ; लंबे समय में थायरॉयड और कैंसर का खतरा
10. सल्फेट(Sulphate) ≤200 mg/L (≤400 mg/L अनुमेय) पानी कड़वा लगता है; दस्त और डिहाइड्रेशन हो सकता है
11. लोहा(Iron) ; कपड़े या बर्तन पर जंग जैसे दाग; पाइपों में बैक्टीरिया जमता है
12. फ्री क्लोरीन (Free Chlorine) 0.2–1.0 mg/L कम मात्रा में—बीमारी का खतरा; ज़्यादा—गंध, आंखों/त्वचा में जलन
13. आर्सेनिेक(Arsenic) 14. कोलीफाम बैक्टरिया (Coliform Bacteria) 0 CFU प्रति 100 mL
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