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रांची में अपहृत भाई-बहन की तलाश तेज: धुर्वा में घर-घर सर्च ऑपरेशन, बिहार-बंगाल-ओडिशा में भेजीं पुलिस टीमें

LHC0088 2026-1-7 06:26:20 views 1013
  

धुर्वा शहीद मैदान के पास बस्ती के लोग बच्चा नही मिलने पर रोड जाम करते। फोटो जागरण



जागरण संवाददाता, रांची। धुर्वा स्थित मौसीबाड़ी मलारकोचा निवासी सुनील यादव के दो अपहृत बच्चे 7 वर्षीय अंश और 6 वर्षीय अंशिका की सकुशल बरामदगी को लेकर पुलिस ने जांच तेज कर दी है। धुर्वा इलाके में घर-घर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है, वहीं पुलिस की विशेष टीमें बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में जांच के लिए भेजी गई हैं।

बच्चों की बरामदगी की मांग को लेकर धुर्वा शहीद मैदान स्थित शेख भिखारी चौक पर विशाल धरना आयोजित किया गया। धरना की अध्यक्षता प्रदेश राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने की। बड़ी संख्या में पुरुषों, महिलाओं और युवाओं ने धरना में भाग लिया। धरना स्थल पर एसएसपी राकेश रंजन, ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर, हटिया डीएसपी प्रमोद कुमार मिश्रा, जगन्नाथपुर थाना प्रभारी दिग्विजय सिंह समेत भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा।

एसएसपी राकेश रंजन ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कैलाश यादव से बातचीत करते हुए बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए 4 आईपीएस, 6 डीएसपी और 12 थाना प्रभारियों की विशेष टीम गठित की गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही सकारात्मक खबर मिलेगी। इस दौरान कैलाश यादव ने पुलिस पर प्रारंभिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि चार दिन पहले ही जांच में तेजी दिखाई गई होती तो शायद अब तक सफलता मिल चुकी होती।

  

(बच्चा नही मिलने पर धरना देते परिवार के लोग। फोटो जागरण)
धरना खत्म होने के बाद बच्चों के घरवाले डीजीपी से मिले

धरना समाप्ति के बाद अपहृत बच्चों के पिता सुनील यादव और अन्य लोग धुर्वा स्थित पुलिस मुख्यालय में राज्य की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा से मुलाकात की। करीब 25 मिनट चली बातचीत में डीजीपी ने कहा कि वह इस मामले को लेकर अत्यंत संवेदनशील हैं और खुद इसकी निगरानी कर रही हैं। बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए विशेष पुलिस टीमें दिन-रात काम कर रही हैं।

कैलाश यादव ने डीजीपी से कहा कि रांची की पूर्व सिटी एसपी होने के नाते वह यहां के अपराध गिरोहों से भली-भांति परिचित हैं, इसलिए उनसे उम्मीदें और भी अधिक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनाक्रोश को देखते हुए आंदोलन की आगामी रणनीति जारी रहेगी। बताया गया कि यह धरना और डीजीपी से मुलाकात आंदोलन की एक कड़ी है। आगे की रणनीति के तहत जनसमूह का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात करेगा।

  
दो जनवरी को लापता हुए थे बच्चे

गौरतलब है कि अंश और अंशिका दो जनवरी को लापता हुए थे। वह घर से चुड़ा लेने के लिए निकले थे। अब तक उनकी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज से भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। धरना कार्यक्रम में मधु मंसूरी, सुनील यादव, गौरीशंकर यादव, मिंटू पासवान, नंदन यादव, बबन यादव, रंजन यादव, उत्तम यादव, परमेश्वर सिंह, उमेश यादव, रामकुमार यादव, सागर कुमार, सतीश महतो, राहुल यादव, बनारस यादव, चंदा देवी, रामजी यादव, शंकर राय, मनीष राय अन्य लोग मौजूद रहें।
मां का रो-रो कर बुरा हाल,बार बार हो रही थी बेहोश

दोनों बच्चों के लापता होने के बाद उनकी मां की हालत बेहद खराब बनी हुई है। वह लगातार रो-रोकर बच्चों को वापस लाने की गुहार लगा रही है। परिजनों के अनुसार सदमे के कारण वह बार-बार बेहोश हो जा रही है, जिससे पूरे मोहल्ले में चिंता का माहौल है। घटना की जानकारी मिलने के बाद एसएसपी राकेश रंजन मोहल्ले में पहुंचे और लोगों से मिलकर पूरी घटना की जानकारी ली। एसएसपी ने संबंधित अधिकारियों को जांच में तेजी लाने और हर संभावित पहलू पर गंभीरता से काम करने का निर्देश दिया।

  
क्या-क्या है आशंका

पुलिस का मानना है कि बच्चों का अपहरण किसी गाड़ी के माध्यम से किया गया होगा। इसी कारण वे आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। पुलिस इस बिंदु की भी जांच कर रही है कि बच्चों के घरवालों से किसी प्रकार का विवाद तो नहीं था, जिसके चलते बच्चों का अपहरण किया गया हो। मामले में कई संदिग्ध और पूर्व में दागी रहे लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है।

पुलिस को आशंका है कि बच्चों को कहीं बेच तो नहीं दिया गया है। इसके साथ ही पुलिस बच्चों के परिचितों की भूमिका की भी जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि यदि कोई परिचित बच्चों को ले गया हो, तो इसी कारण बच्चों ने किसी तरह का विरोध नहीं किया होगा।
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