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पंजाब के मुक्तसर में दूषित पानी का संकट गहराया, 50 फीसदी सैंपल फेल होने से बढ़ी चिंता

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पंजाब के मुक्तसर में दूषित पानी का संकट गहराया, 50 फीसदी सैंपल फेल होने से बढ़ी चिंता (File Photo)



राजिंदर पाहड़ा, श्री मुक्तसर साहिब। जिला मुक्तसर में जमीनी पानी अधिकांश हिस्सों में उपयोग करने योग्य नहीं है। इस कारण जिले में कैंसर सहित अन्य बीमारियां भी तेजी से बढ़ी हैं। 15 साल पहले शिअद-भाजपा गठबंधन की सरकार में उस समय के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अपने पैतृक जिला मुक्तसर के 33 गांवों व शहरी क्षेत्र में आरओ वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए थे ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति हो सकें।

लेकिन बड़ी संख्या में आरओ वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों में कई गड़बड़ियों के कारण अब सालों से बंद पड़े हैं। बता दें कि 15 वर्ष पहले आरओ प्लांट राज्य सरकार ने निजी कंपनियों के सहयोग से लगाए थे। वहीं गांव वासियों ने कहा कि आरओ वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों को फिर से चालू करवाया जाए,

क्योंकि दूषित पानी पीने से कई तरह की बीमारियों का खतरा है । जिले में हर साल लिए जा रहे पानी के सैंपलों में से 50 प्रतिशत फेल पाए जा रहे हैं। पिछले साल लिए सैंपलों में डीसी दफ्तर,बस स्टैंड, वाटर वर्क्स सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों के पानी के सैंपल फेल पाए गए थे। जिससे लोगों में चिंता और बढ़ गई थी।

महामारी विशेषज्ञ डॉ. हरकीर्तन सिंह के मुताबिक 60 प्रतिशत सैंपल वाटर वर्क्स के नहरी पानी और 40 फीसद जमीनी पानी के सैंपल भरे जाते हैं। फेल पाए जाने वाले सैंपलों में बैक्टिरियल कटेमीनेशन, हाई टीडीएस, हार्डनेस और सीवरेज के पानी की मिक्सिंग मिल रही है।
पांच साल में पानी के भरे और फेल सैंपलों का डेटा-

जानकारी के अनुसार वर्ष 2021 में अप्रैल से 2022 मार्च तक विभाग ने 168 सैंपल भरे थे। जिनमें से 126 सैंपल फेल पाए गए थे। इसी तरह वर्ष 2022 में अप्रैल से वर्ष 2023 तक करीब 200 सैंपल भरे गए थे। इनमें भी 100 के करीब सैंपल फेल पाए गए थे। वर्ष 2024 में भी 217 सैंपल भरे गए हैं जिनमें से 38 फेल पाए गए। इसी तरह वर्ष 2025 में 300 के करीब सैंपल लिए गए जिसमें से लगभग 40 प्रतिशत फेल पाए गए हैं।
जिले में लैब नहीं, जांच के लिए भेजें जाते हैं खरड़

जिले में पानी के सैंपलों की जांच के लिए लैब नहीं है। जांच के लिए सैंपलों को खरड़ में भेजा जाता है जहां से वर्कलोड पर डिपेंड है अगर काम ज्यादा है तो रिपोर्ट को हफ्ता भी लग सकता है। अगर काम कम है तो दो तीन दिन में रिपोर्ट आ जाती है।
यहां से भरे जाते हैं पानी के सैंपल-

डॉ. हरकीर्तन सिंह के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की ओर से तमाम क्षेत्रों से ही पानी के सैंपल भरे जाते हैं जिनमें गांव और शहरों के स्थान शामिल हैं। इन स्थानों में घर, स्कूल, कालेज,बैंक,सरकारी और प्राइवेट सभी तरह के दफ्तर, अस्पताल, वाटर वर्क्स, आरओ प्लांट शामिल हैं।
क्षतिग्रस्त पाइपों से अभी भी सीवरेज युक्त पानी की सप्लाई

शहरी क्षेत्रों में सालों पुरानी पड़ी सीवरेज और पानी की पाइपें बीच-बीच में क्षतिग्रस्त हैं जिनकी वजह से घरों में पानी सीवरेज युक्त अभी भी जा रहा है। इस ओर अधिकारियों को ध्यान देने की आवश्यकता है।लोग कई बार शिकायतें कर चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। पिछले साल भी शहरियों ने धरना दिया था कि उन्हें स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा।
लगातार लिए जा रहे पानी के सैंपल

डॉ. हरकीर्तन सिंह ने बताया कि टीमें समय समय पर पानी के सैंपल लेकर जांच कर रही है। जहां भी लगे कि पानी खराब है वहां क्लोरीन डाल कर सही किया जाता है। अभी स्थिति ठीक है। पिछले सालों में सैंपल ज्यादा फेल हो रहे थे लेकिन अभी पानी ठीक पाए जा रहे हैं।
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