ग्रामीण बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल, बनेंगे मॉडल आवासीय विद्यालय
सुमंत कुमार, पिपरासी। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की मुख्यधारा से कटे बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ने के लिए सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है। अब गांव के वे बच्चे, जो स्कूल जाने के बजाय बकरी या गाय चराने, पतंग उड़ाने या अन्य गतिविधियों में समय बिताते हैं, उनके लिए विद्यालय परिसर में ही नि:शुल्क आवास और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही इन बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी, ताकि वे नियमित पढ़ाई कर सकें।
इस योजना के तहत बनने वाले आवासीय विद्यालयों पर होने वाले कुल खर्च का 70 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 30 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। शिक्षा विभाग ने इस दिशा में तेजी से कार्य शुरू कर दिया है।
विभाग ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि बगहा अनुमंडल स्तर पर दो और प्रखंड स्तर पर दो ऐसे विद्यालयों को चिह्नित किया जाए, जहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध हो। इन्हीं विद्यालयों को मॉडल स्कूल का दर्जा दिया जाएगा और यहां अत्याधुनिक छात्रावासों का निर्माण किया जाएगा।
आदेश के बाद गंडक पार के प्रखंडों में उपयुक्त विद्यालयों और भूमि की तलाश शुरू कर दी गई है। विभागीय अधिकारियों को उम्मीद है कि नए साल से इस योजना का लाभ बच्चों को मिलना शुरू हो जाएगा और बड़ी संख्या में ड्रॉपआउट बच्चे फिर से पढ़ाई की ओर लौटेंगे।
मॉडल स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी। इन विद्यालयों में आवास, भोजन, शिक्षण सामग्री और देखरेख की पूरी व्यवस्था सरकार द्वारा की जाएगी। उद्देश्य यह है कि आर्थिक, सामाजिक या पारिवारिक कारणों से पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
भूमि और विद्यालय मार्किंग की प्रक्रिया तेज
पिपरासी के अंचलाधिकारी शशिकांत यादव ने बताया कि यदि आवासीय भवन निर्माण के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता पड़ेगी, तो सरकारी भू-खंड उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि योजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन पूरी तरह सहयोग करेगा।
वहीं, पिपरासी व मधुबनी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि विभागीय निर्देश के आलोक में उत्क्रमित मध्य विद्यालय परसौनी और उत्क्रमित मध्य विद्यालय सुजनही घोड़हवा को मॉडल विद्यालय के लिए चिन्हित किया गया है। इस संबंध में जिला स्तर पर रिपोर्ट भी भेज दी गई है।
उन्होंने बताया कि इन विद्यालयों में आवासीय भवन का निर्माण होगा और विशेष शिक्षकों के माध्यम से उन बच्चों को पढ़ाया जाएगा, जो अब तक जानवर चराने या पतंग उड़ाने जैसे कार्यों में लगे थे। |
|