जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। जिले में गाल ब्लैडर (पित्ताशय) कैंसर को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है। होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर की ओर से कराए गए पापुलेशन बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री (पीबीसीआर) की वर्ष 2018 से 2021 की रिपोर्ट में गाल ब्लैडर कैंसर के मामलों और इससे होने वाली मृत्यु दर को चिंताजनक बताया गया है।
इस अवधि में 40 गाल ब्लैडर के कैंसर के मामले सामने आए। पहले ही वर्ष में इनमें से 85 प्रतिशत मरीजों की मौत हो गई। अन्य की मौत भी तीन वर्ष के अंदर हो गई। यह शोध प्रतिष्ठित ई-कैंसर जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसकी रिपोर्ट इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) को भी शोध के लिए भेजी गई है।
जिले के शहरी क्षेत्र के साथ मुरौल, सकरा, कांटी, मोतीपुर व मुशहरी प्रखंड का चयन इस अध्ययन के लिए किया गया है। वर्ष 2018 से इन क्षेत्रों की करीब 22 लाख की आबादी पर विभिन्न प्रकार के कैंसर को लेकर जनसंख्या आधारित सर्वे व शोध कार्य किया जा रहा है।
टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई के सहयोग से संचालित इस रजिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 से 2021 के बीच जिले में कुल 2,165 नए कैंसर के मामले दर्ज किए गए। इनमें 1,048 पुरुष (48.4 प्रतिशत) व 1,117 महिलाएं (51.6 प्रतिशत) शामिल हैं। कुल कैंसर दर प्रति एक लाख जनसंख्या पर 38.9 आंकी गई, जिसमें पुरुषों के लिए 46.9 व महिलाओं के लिए 31.9 रही।
तेजी से सामने आ रहे मामले
रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद गाल ब्लैडर कैंसर के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। इसके बाद सर्विक्स, ओवरी व फेफड़े के कैंसर के मामले दर्ज किए गए। गाल ब्लैडर कैंसर को लेकर विशेष चिंता जताई गई है, क्योंकि अधिकतर मरीज देर से अस्पताल पहुंच रहे हैं।
अस्पताल आधारित कैंसर रजिस्ट्री रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021-22 में पित्ताशय कैंसर के कुल 207 मामले सामने आए, जिनमें 75.4 प्रतिशत मरीज महिलाएं व 24.6 प्रतिशत पुरुष थे।
इनमें 157 नए व 50 पुराने यानी अन्य जिलों से रेफर होकर आए मरीज शामिल थे। मरीजों में 92 मुजफ्फरपुर, 25 पूर्वी चंपारण, 19 सीतामढ़ी से थे, जबकि अन्य 35 जिलों से 68 मरीज आए। कुल मामलों में 44.4 प्रतिशत मरीज जिले के ही थे। पुरुष मरीजों की औसत आयु 54 व महिलाओं की 52 वर्ष पाई गई।
समय से जांच पर इलाज संभव
रिपोर्ट के अनुसार 46.9 प्रतिशत मरीजों में कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैल चुका था। इसे दूरस्थ मेटास्टेसिस की श्रेणी में रखा गया। 59.9 प्रतिशत मामलों में एडिनोकार्सिनोमा प्रकार का कैंसर पाया गया। उपचार को लेकर 68.6 प्रतिशत मरीजों के लिए इलाजात्मक (क्यूरेटिव) योजना बनाई गई।
केवल 47 प्रतिशत मरीजों को ही किसी न किसी प्रकार का इलाज मिल सका। 41 प्रतिशत मरीजों को कीमोथेरेपी, 3.4 को सर्जरी व 2.9 प्रतिशत को सर्जरी व कीमोथेरेपी दोनों उपचार मिले।
चिंता का विषय यह रहा कि 77 प्रतिशत मरीज इलाज के दौरान फॉलोअप से बाहर हो गए। होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. रविकांत सिंह ने बताया गाल ब्लैडर कैंसर के शुरुआती लक्षण सामान्य पेट दर्द, अपच व पीलिया जैसे होते हैं, जिन्हें लोग गंभीरता से नहीं लेते।
महिलाओं में हार्मोनल कारण, पित्ताशय की पथरी, खानपान की आदतें व गंगा–गंडक बेसिन क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां प्रमुख कारण हो सकती हैं। बताया कि समय पर जांच से यह बीमारी लाइलाज नहीं है। इलाज संभव है।
रोकथाम के लिए पहल
- मॉडल अस्पताल से पीएचसी स्तर तक कैंसर स्क्रीनिंग अभियान
- पहचान के बाद जांच व इलाज की सुविधा
- बिहार सरकार के सहयोग से जागरूकता और अनुसंधान कार्यक्रम संचालित
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