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अमेरिका और तेल कंपनियों को क्यों पसंद हैं वेनेजुएला की नई नेता डेल्सी रोड्रिगेज, क्या है ट्रंप की रणनीति?

cy520520 3 day(s) ago views 326
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि आखिर अमेरिका और वैश्विक तेल कंपनियों ने डेल्सी रोड्रिगेज पर भरोसा क्यों किया? राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से पहले ही तेल उद्योग से जुड़े बड़े अधिकारी, निवेशक और लॉबिस्ट वॉशिंगटन में यह दलील दे रहे थे कि मादुरो के बाद अगर कोई देश को संभाल सकता है, तो वह उनकी नंबर-2 डेल्सी रोड्रिगेज हैं।

डेल्सी रोड्रिगेज खुद तेल मंत्री रह चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, आर्थिक संकट और सरकारी बदइंतजामी के दौर में वेनेजुएला के तेल सेक्टर को संभालने का अनुभव रखती हैं। तेल उद्योग का मानना था कि वे अमेरिका की उस योजना को आगे बढ़ा सकती हैं, जिसके तहत वेनेजुएला को फिर से एक बड़ा तेल उत्पादक देश बनाया जाए।

ट्रंप प्रशासन के भीतर भी अलग-अलग स्तर पर यही निष्कर्ष निकला। अधिकारियों का मानना था कि सरकार और निजी कंपनियों के बीच सेतु मानी जाने वाली रोड्रिगेज, विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो की तुलना में अर्थव्यवस्था को जल्दी स्थिर कर सकती हैं और अमेरिकी कंपनियों के लिए रास्ता खोल सकती हैं।
तेल उद्योग की पसंद क्यों बनीं डेल्सी रोड्रिगेज?

अमेरिकी प्रशासन इराक में सद्दाम हुसैन के पतन के बाद फैली अराजकता से सबक लेना चाहता था। ऐसे में सत्ता परिवर्तन के बाद व्यवसायिक निरंतरता बनाए रखना जरूरी माना गया। रोड्रिगेज इस कसौटी पर खरी उतरती हैं क्योंकि वे पहले से ही तेल तंत्र की कमान संभाल रही थीं और सरकार के भीतर उनके दशकों पुराने रिश्ते हैं।

हालांकि अमेरिका की बड़ी तेल कंपनियां सीधे तौर पर इस लॉबिंग में शामिल नहीं थीं। शेवरॉन, जो फिलहाल वेनेजुएला में काम करने वाली एकमात्र अमेरिकी बड़ी कंपनी है उसने कहा कि उसे मादुरो को हटाने की कार्रवाई की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी और उसने नई सरकार को लेकर कोई बातचीत नहीं की। कंपनी के मुताबिक, उसका काम कानून के तहत बिना रुकावट जारी है।

शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम नेता के रूप में समर्थन दिया। उन्होंने मारिया कोरिना माचाडो को नेतृत्व के लिए सम्मान की कमी वाला बताया। यह बयान माचाडो समर्थकों के लिए बड़ा झटका माना गया।
अमेरिका का रुख और तेल प्रतिबंधों का दबाव

व्हाइट हाउस ने इस मुद्दे पर विस्तार से टिप्पणी नहीं की, लेकिन विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपने तेल प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सैन्य मौजूदगी का इस्तेमाल अपने नीति लक्ष्यों के लिए करेगा। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका रोड्रिगेज की बातों से ज्यादा उनके काम पर नजर रखेगा।

तेल कंपनियों का दबाव है कि प्रतिबंधों में जल्द ढील दी जाए। दिसंबर के अंत तक वेनेजुएला को तेल भंडारण की कमी के कारण कुएं बंद करने पड़े थे। अगर यह स्थिति बनी रहती है तो अर्थव्यवस्था की बहाली मुश्किल होगी और रोड्रिगेज की सत्ता भी कमजोर पड़ सकती है।

सोमवार को डेल्सी रोड्रिगेज ने नेशनल असेंबली में कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। पहले उन्होंने मादुरो की गिरफ़्तारी को अपहरण बताया, लेकिन अगले दिन अमेरिका के साथ कानून के दायरे में सहयोग की बात कही। सूत्रों का मानना है कि शुरुआती सख्त बयान आंतरिक दबाव से बचने के लिए थे।
तेल कंपनियों की उम्मीदें

56 वर्षीय रोड्रिगेज मादुरो सरकार के सबसे ताकतवर चेहरों में रही हैं। वे विदेश मंत्री भी रह चुकी हैं और 2024 में तेल मंत्री बनीं। उन्हें राष्ट्रीय तेल कंपनी PDVSA की सफाई, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्क बेहद मजबूत हैं। वे ह्यूस्टन से लेकर मुंबई तक तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से नियमित बात करती हैं और बीजिंग व मॉस्को में भी उनके गहरे रिश्ते हैं। शेवरॉन के अलावा कोनोकोफिलिप्स, शेल, रेप्सोल, एनी और मॉरेल ए प्रोम जैसी कंपनियां भी वेनेजुएला में वापसी या विस्तार की संभावना देख रही हैं।

निवेशकों और बॉन्डहोल्डर्स को भी उनसे उम्मीद है, खासकर करीब 60 अरब डॉलर के कर्ज के पुनर्गठन को लेकर। मादुरो के विपरीत, रोड्रिगेज पर अमेरिका में कोई आपराधिक आरोप नहीं हैं जिससे उन्हें एक व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है।
क्रांतिकारी विरासत से सत्ता तक

डेल्सी रोड्रिगेज ने ह्यूगो शावेज के दौर में राजनीति में कदम रखा। उनके पिता जॉर्ज एंटोनियो रोड्रिगेज एक वामपंथी नेता थे जिनकी 1976 में जेल में मौत हो गई थी। यह घटना डेल्सी की राजनीतिक पहचान का अहम हिस्सा रही है। उनके भाई जॉर्ज रोड्रिगेज भी मादुरो सरकार के बड़े चेहरे रहे हैं।

वे लंबे समय तक काम करने के लिए जानी जाती हैं और मादुरो के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में थीं। 2024 के विवादित चुनाव के बाद हुए सख्त दमन के दौरान भी वे मादुरो के साथ थीं।

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