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शहर की विभिन्न कंपनियों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट पदार्थ से खरकई का पानी हो रहा दूषित।
जसगरण संवाददाता, जमशेदपुर। झारखंड में जमशेदपुर के जुगसलाई क्षेत्र में औद्योगिक प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। स्थानीय निवासी श्रवण कुमार देबुका ने इस गंभीर स्थिति को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अध्यक्ष को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। शिकायत में मुख्य रूप से टाटा पिगमेंट और टाटा स्टील से निकलने वाले रासायनिक कचरे और धुएं पर रोक लगाने की अपील की गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जुगसलाई और आसपास के इलाकों की हवा में \“ब्लैक डस्ट\“ (काले कण) इस कदर घुल गए हैं कि घरों की छतों और पानी के बर्तनों पर काली परत जम रही है।
हवा में काला धुआं, पानी में एसिड इस जहरीली हवा के कारण बच्चे और बुजुर्ग सांस की तकलीफ और त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। आरोप है कि टाटा पिगमेंट्स का अम्लीय (केमिकल युक्त) पानी बिना उचित उपचार के नालों के जरिए जुगसलाई शिव घाट के पास सीधे खरकई नदी में बहाया जा रहा है।
संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला
श्रवण कुमार देबुका ने इसे संविधान द्वारा प्रदत्त \“जीवन के अधिकार\“ (अनुच्छेद 21) का सीधा हनन बताया है। उन्होंने सीपीसीबी से मांग की है कि:
- कंपनियों के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) की कार्यक्षमता की कड़ाई से जांच हो।
- नदी के मुहाने से पानी के \“स्पॉट सैंपल\“ लिए जाएं ताकि वास्तविकता सामने आ सके।
- क्षेत्र की वायु गुणवत्ता (AQI) की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
प्रदूषण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल
शिकायत में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। सीपीसीबी से मांग की गई है कि पिछले तीन वर्षों में जेएसपीसीबी द्वारा कंपनियों को दिए गए नोटिस, की गई कार्रवाई और उनकी लैब के उपकरणों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत जांच की जाए।
यह मामला अब केवल प्रदूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि जनस्वास्थ्य और मानवाधिकारों से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन गया है। अब देखना यह है कि केंद्रीय बोर्ड इस पर क्या कड़ा रुख अपनाता है।  |
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