search

परिषदीय विद्यालयों में अब मिडे-डे मील के भरोसे नहीं रहेंगे बच्चे, सुबह के समय पौष्टिक नाश्ता देने की कवायद शुरू

Chikheang 2026-1-6 10:56:40 views 716
  

पिपरगवां के परिषदीय विद्यालय में दोहपर का भोजन ग्रहण करते बच्चे



जागरण संवाददाता, बांदा। परिषदीय विद्यालयों में दोपहर के मिड-डे मील के साथ अब सुबह के समय पौष्टिक नाश्ता मुहैया करवाने की कवायद शुरू की गई है। बच्चों को ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर सुबह नाश्ते में पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता या फिर सुबह घर से बिना नाश्ता या भूखे ही बिना खाना खाए ही स्कूल पहुंच जाते हैं।

ऐसे में बच्चों को दोपहर के समय मिलने वाले मिड-डे मील के भरोसे ही रहना पड़ता है। जिससे उन्हें भरपूर पोषण नहीं मिल पाता है। शासन की इस पहल से मंडल के परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत करीब चार लाख से अधिक बच्चों को नाश्ते में पाैष्टिक आहार मिल सकेगा।

मंडल के चारों जिलों में 4788 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें कुल 4,13,674 बच्चे अध्ययनरत हैं। स्कूली बच्चों को पर्याप्त पोषण मुहैया कराने की मुहिम में दोपहर के भोजन (मिड-डे मील) के साथ ही अब उन्हें सुबह के समय पौष्टिक नाश्ता भी उपलब्ध करवाने की दिशा में कवायद शुरू की गई है।

इससे बच्चों को मानसिक व शारीरिक रूप से बेहतर बनाया जा सकेगा। ग्रामीण इलाकों में घरों में भरपूर पौष्टिक आहार न मिलने व सुबह के समय नाश्ता न मिल पाने आदि के चलते बच्चे शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर हो जाते हैं।

चिकित्सकों के अनुसार सुबह का नाश्ता एक तरह से संपूर्ण आहार होता है। ऐसे में शासन ने परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को सुबह के पौष्टिक नाश्ता देने की पहल शुरू की है। इसमें गुजरात व कर्नाटक में इस पहल के शुरू होने के बाद केंद्र सरकार अब अन्य राज्यों को इस दिशा में प्रोत्साहित करने में जुटी है।

इसके लिए सभी राज्यों के साथ गुजरात और कर्नाटक के प्लान को साझा किया गया है। इसके साथ ही पीएम-पोषण योजना के लिए होने वाली बैठक के दौरान इसे लेकर भी एक प्लान साझा करने को कहा गया है।

पौष्टिक नाश्ते के बाद बढ़ जाती है सीखने की क्षमता

स्कूली बच्चों को दोपहर के भोजन के साथ सुबह का नाश्ता देने की यह पहल नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सिफारिश के बाद आगे बढ़ी है, जिसमें कई अध्ययनों को हवाला देते हुए कहा गया है कि बच्चों को सुबह पौष्टिक नाश्ता देने के बाद कुछ घंटों तक उनमें मुश्किल विषयों को प्रभावी ढंग से सीखने की क्षमता बढ़ जाती है।

बच्चों को दोपहर के भोजन के साथ सुबह की नाश्ता देने की सिफारिश की गई। जानकारी सामने आई कि स्कूलों में अधिकांश बच्चे सुबह खाली पेट ही स्कूल आते हैं। इसके बाद गुजरात और कर्नाटक ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े कई फाउंडेशन के सहयोग से इसे शुरू किया है। अब इसे यहां भी लागू किया जाना है।

यह भी पढ़ें- UP Board Exams 2026: हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्री बोर्ड एग्जाम आज से शुरू, असल परीक्षा की तैयारी परखेंगे छात्र

गुजरात में नाश्ते में क्या दिया जाता है?

गुजरात में बच्चों को प्रतिदिन नाश्ते में औसतन दो सौ किलो कैलोरी और छह ग्राम प्रोटीन मुहैया कराने का लक्ष्य रखा है, जिसमें दूध व बाजरा जैसे मोटे अनाज से बने खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं। राज्य सरकार ने इसे लेकर सीएम-पौष्टिक अल्पाहार योजना शुरू की है। स्कूलों में यह नाश्ता के समय ही परोसा जाता है। सरकार इसमें सामाजिक संगठनों का भी सहयोग लेती है।

कर्नाटक में बच्चों को नाश्ते में क्या दिया जाता है?

कर्नाटक में भी बच्चों को नाश्ते में रागी हेल्थ मिक्स और दूध दिया जाता है। इसके साथ ही सप्ताह के चार से पांच दिन अंडे और केले भी दिए जाते हैं। राज्य सरकार व ट्रस्ट के सहयोग से यह कार्यक्रम संचालित हो रहा है।
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
167066