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राजस्थान की चिकित्सा व्यवस्था में फर्जीवाड़ा, विदेश से MBBS की डिग्री हासिल करने वालों की होगी जांच

cy520520 2026-1-6 05:56:42 views 587
  

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।  



जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान की चिकित्सा व्यवस्था में दो तरह का फर्जीवाड़ा सामने आया है। एक बड़ा फर्जीवाड़ा विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आने वालों का है। इन लोगों ने विभिन्न देशों से एमबीबीएस की डिग्री तो हासिल कर ली, लेकिन भारत में अनिवार्य विदेशी चिकित्सा स्नात्तक परीक्षा (एफएमजीई) में फेल हो गए।

यह परीक्षा पास किए बिना इनका राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में पंजीकरण नहीं हो सकता था। चिकित्सा कार्य नहीं कर सकते थे। ऐसे में इन्होंने 16 से 18 लाख रुपये में फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र हासिल कर लिए। इन फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग से इंटर्नशिप की अनुमति ले ली और राजस्थान के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप भी कर ली।
मंत्री ने दिए जांच के आदेश

मामला सामने आने के बाद राजस्थान स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने जांच शुरू की है। प्रदेश के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने भी जांच के आदेश दिए हैं। अब एसओजी और चिकित्सा विभाग ने अपने-अपने स्तर पर ऐसे आठ हजार से अधिक चिकित्सकों की जांच प्रारंभ की है जो विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई करके आए हैं।
जांच में क्या सामने आया?

अब तक की जांच में तीन ऐसे चिकित्सक सामने आए हैं, जिन्होंने विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई की, लेकिन भारत में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग की परीक्षा पास नहीं कर सके और पैसे देकर फर्जी एफएमजीई प्रमाण पत्र हासिल करने के बाद राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप की है। एसओजी ने इन्हें गिरफ्तार किया है।
एसओजी की जांच में कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जिन्होंने चीन, बांग्लादेश, किर्गिस्तान, जार्जिया, नेपाल, जर्मनी एवं कजाकिस्तान से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की है। एसओजी इस बात की भी जांच कर रही है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने कैसे पंजीकरण कर दिया।

एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल का कहना है कि जांच सिर्फ राजस्थान तक ही सीमित नहीं है। गुजरात और मध्यप्रदेश में भी संपर्क सामने आए हैं। जिन देशों से डिग्री ली गई है, वहां से भी रिपोर्ट मंगवाई है। यह जांच की जा रही है कि फर्जी प्रमाण पत्र कौन बना रहा है।
अधिकारियों का क्या कहना है?

चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक नहीं है कि इंटर्नशिप करने वाले सभी चिकित्सकों ने फर्जी प्रमाणपत्र हासिल किया हो, लेकिन जांच तो होगी। दूसरा बड़ा फर्जीवाड़ा आरएमसी में सामने आया है, जहां करीब एक सौ फर्जी चिकित्सकों का पंजीकरण कर दिया गया।

इन फर्जी चिकित्सकों ने तमिलनाडु, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश की मेडिकल काउंसिल से फर्जी प्रमाणपत्र हासिल किए और फिर आरएमसी में पंजीकरण करवा लिया। पंजीकरण करते समय आरएमसी के अधिकारियों ने इन फर्जी चिकित्सकों की डिग्री, 12वीं कक्षा पास की अंकतालिका एवं अन्य प्रमाण पत्र नहीं देखे। ये सभी फर्जी थे। यह मामला पिछले साल सामने आया था, सरकार ने अब नए सिरे से इसकी जांच प्रारंभ की है।

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