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खजुराहो में देश का पहला पारंपरिक गुरुकुल शुरू, देशज कला-शिल्प का मिलेगा निश्शुल्क प्रशिक्षण, यह है चयन प्रक्रिया

cy520520 2026-1-5 19:26:44 views 1041
  

गुरुकुल का मुक्ताकाश मंच, जहां वर्तमान में बीन वादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।



डिजिटल डेस्क, भोपाल। संस्कृति विभाग ने मध्य प्रदेश की विलुप्त होतीं देशज कलाओं और ज्ञान के संरक्षण-संवर्धन के लिए खजुराहो में गुरुकुल की स्थापना की है, जहां देशज कला-शिल्प का पारंपरिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसकी विधिवत शुरुआत 20 फरवरी से खजुराहो नृत्य समारोह में होगी। गुरुकुल में पारंपरिक कलाओं के गुरु प्रशिक्षण देंगे।
कलागुरु तय करेंगे अवधि

प्रशिक्षण कितने दिन का होगा, इसका निर्धारण कला गुरु स्वयं करेंगे। कला-शिल्प के प्रत्येक बैच में 20 प्रशिक्षु लिए जाएंगे। विज्ञापन जारी कर प्रवेश की सूचना दी जाएगी। 20 से अधिक आवेदन होने पर चयन साक्षात्कार से होगा।

संस्कृति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शास्त्रीय प्रदर्शन कलाओं को सिखाने के लिए देश में कई सरकारी और निजी संस्थान हैं, लेकिन देशज प्रदर्शनकारी कलाओं और शिल्प को सिखाने के लिए कोई औपचारिक संस्थान नहीं है। देश में यह अपनी तरह का पहला संस्थान है। इस अनूठे गुरुकुल का संचालन लोक कला एवं बोली विकास अकादमी करेगी।

  
निश्शुल्क व्यवस्था

प्रशिक्षार्थियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, उनके रहने खाने भी व्यवस्था गुरुकुल में ही रहेगी। शिल्प प्रशिक्षण का कच्चा माल गुरुकुल ही उपलब्ध कराएगा और प्रशिक्षण के दौरान निर्मित उत्पाद वहीं जमा हो जाएंगे।

  
मुख्यमंत्री ने 2024 में की थी घोषणा

बता दें कि खजुराहो स्थित आदिवर्त संग्रहालय में गुरुकुल के निर्माण की घोषणा मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने 2024 में खजुराहो नृत्य समारोह के दौरान की थी। घोषणा के साथ ही उन्होंने भूमिपूजन भी किया था। डेढ़ साल के भीतर गुरुकुल बनकर तैयार हो गया। मुख्यमंत्री ने गत माह खजुराहो में हुई कैबिनेट बैठक में गुरुकुल का उद्घाटन भी किया है।

  
ऐसा है गुरुकुल

  • - 6.50 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ गुरुकुल।
  • - 96 प्रशिक्षुओं के लिए आवासीय व्यवस्था।
  • - 04 कला गुरुओं के लिए विशेष आवासीय कक्ष।
  • - 04 विधाओं में प्रशिक्षण एक साथ संचालित हो सकेगा
  • - 01 मुक्ताकाश मंच तैयार, एक प्रेक्षागृह निर्माणाधीन।

फिलहाल लोकरंग के लिए कार्यशाला

गुरुकुल का औपचारिक उद्घाटन होने के बाद वास्तविक प्रशिक्षण शुरू नहीं हो पाया। तब तक लोकरंग के लिए कार्यशालाओं का संचालन शुरू किया गया है। दो जनवरी से अशोकनगर के कालबेलिया कला गुरु जितेंद्र कुमार बीन वादन का प्रशिक्षण दे रहे हैं। मणिपुर के संगीतकार एच अनिल सिंह मणिपुरी लोक संगीत सिखा रहे हैं। दोनों कार्यशालाओं में 15-15 प्रतिभागी हैं। इनका प्रदर्शन भोपाल के रवींद्र भवन में 26 से 30 जनवरी तक होने वाले लोकरंग उत्सव में होगी।

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शुरुआत में सिर्फ प्रशिक्षण का प्रविधान किया किया गया है। बाद में किसी संस्थान या विश्वविद्यालय से संबंद्धता लेकर प्रमाणपत्र और डिप्लोमा उपाधि देने की भी व्यवस्था होगी।
- अशोक मिश्रा, निदेशक गुरुकुल
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