search

हिमाचल पंचायत चुनाव में देरी पड़ेगी भारी, केंद्रीय ग्रांट पर गहरा सकता है संकट, 31 जनवरी के बाद क्या होगा?

LHC0088 2026-1-5 06:56:35 views 1263
  

हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव पर संग्राम जारी है। प्रतीकात्मक फोटो  



यादवेन्द्र शर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव 31 जनवरी तक करवाना निर्धारित नियमों के तहत आवश्यक है। वर्तमान स्थितियों में जनवरी में चुनाव संभव नहीं हैं और ऐसे में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव अप्रैल या मई में हो सकते हैं।

ऐसे में पंचायती राज अधिनियम के अनुसार नई कार्यकारिणी के गठन न होने पर प्रशासक लगाने पड़ सकते हैं। ऐसे में चुनावों में की जा रही देरी गंभीर वित्तीय संकट का कारण बन सकती है।  
गहरा सकता है ग्रांट पर संकट

यदि समय रहते पंचायती राज संस्थाओं की तीन स्तरीय प्रणाली और शहरी निकायों के चुनाव नहीं करवाए गए तो प्रदेश की पंचायतों को मिलने वाली केंद्रीय ग्रांट पर संकट गहरा सकता है। पंचायती राज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतों में चुने हुए जनप्रतिनिधियों का होना अनिवार्य है, ताकि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके।
प्रशासक व्यवस्था में ग्रांट मिलना कठिन

पंचायती राज अधिनियम के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के चुनाव यदि 31 जनवरी तक नहीं होते, तो मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। ऐसी स्थिति में सरकार को पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने पड़ सकते हैं। नियमों के तहत प्रशासक व्यवस्था में पंचायतों को सीधे केंद्रीय योजनाओं की ग्रांट मिलना कठिन हो जाता है, जिससे विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका रहती है।
इन योजनाओं में मिलते हैं करोड़ों रुपये

प्रदेश की पंचायतों को हर वर्ष केंद्र सरकार से विभिन्न मदों में करोड़ों रुपये की सहायता मिलती है। इसमें 15वें वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, मनरेगा और अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं की राशि शामिल है। इन योजनाओं की शर्तों में पंचायतों में निर्वाचित निकायों का होना प्रमुख है। यदि चुनाव नहीं हुए, तो यह राशि या तो अटक सकती है या फिर जारी होने में देरी हो सकती है।

पंचायत स्तर पर विकास कार्यों से जुड़े लोग और पूर्व प्रतिनिधि भी चुनाव में देरी को लेकर चिंता जता रहे हैं।
कार्यकाल समाप्त होने के बाद क्या रहेगी व्यवस्था

वर्तमान प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के साथ त्रिस्तरीय प्रणाली समाप्त हो जाएगी। हालांकि पंचायतों में प्रशासक और इसके अलावा तीन सदस्यीय समिति को बनाने की व्यवस्था है। इसमें पंचायत के सचिवों को प्रशासक लगाए जाने का प्रविधान है, जबकि तीन सदस्यीय समिति में पंचायत सचिव के अलावा दो अन्य लोगों को लगाया जा सकता है। पंचायतों को आने वाली राशि को निकालने का प्रविधान इन्हें ही होगा।
क्या कहते हैं पंचायती राज सचिव

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सचिव सी पालरासु का कहना है कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर करवाना चाहते हैं। इन चुनावों को करवाने से इन्कार नहीं किया है। ग्रांट को रोका या देरी होती है तो इस संबंध में केंद्र के समक्ष मामला उठाया जाएगा और सारी स्थिति रखी जाएगी। अधिनियम के अनुसार समय पर चुनाव न होने पर प्रशासक लगाए जाने की व्यवस्था है।

यह भी पढ़ें: हिमाचल: आखिर कब होंगे पंचायत चुनाव? सरकार के तर्क के बाद हाई कोर्ट में अब दो दिन बाद फिर होगी सुनवाई
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
165790