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बिजनौर में सबसे ठंडा दिन रहा रविवार, तापमान 3.4 डिग्री तक गिरा; फसलों को नुकसान की आशंका

deltin33 6 day(s) ago views 1067
  



जागरण संवाददाता, बिजनौर। रविवार को महीने भर बाद पाले ने फिर से वापसी की है। खेतों में पाले की परत जमी रही। पाले ने पाला पांच डिग्री सेल्सियस तक गिरा दिया। रविवार इस सर्दी का सबसे ठंडा दिन रहा। सुबह को धूप निकली लेकिन बाद में कोहरे और शीतलहर ने जिले को घेर लिया।

पूरा दिन हाड़ कंपाने वाली ठंड रही। हालांकि बादल छाने के बाद भी अब बरसात होने की संभावना बहुत कम रह गई हैं। बरसात अगर होती है तो यह फसलों को बहुत लाभ देगी।

नए साल के पहले तीन दिन हाड़ कंपाने वाली ठंड के नाम रहे। बादल, कोहरा और शीतलहर ने एक मिनट के लिए ठंड से राहत नहीं लेने दी। तीन दिन में सूरज नाम के लिए भी नहीं निकला। रविवार सुबह बहुत कम कोहरा था और बादल भी छंट चुके थे लेकिन खेतों में पाले की सफेद चादर गन्ने की पत्ती पर बिछी हुई थी।

पाले की वजह से सुबह को हाथ-पैर ठंड की वजह से एकदम सुन्न ही रहे। हालांकि सुबह लगभग आठ साढ़े आठ बजे तक धूप निकल आई। धूप निकलने पर थोड़ी राहत मिली लेकिन 11 बजे तक बादलों ने फिर से आसमान को घेर लिया और शीतलहर भी लोगों को कंपाने के लिए मैदान में उतर आई।

इसके बाद तो पूरा दिन बस शीतलहर और बादलों का ही बोलबाला रहा। पूरा दिन शीतलहर हाड़ कंपाते रही। बादल भी थाेड़ी बहुत देर के लिए ही निकले। शनिवार को न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री सेल्सियस था जो रविवार को गिरकर 3.6 डिग्री सेल्सियस तक रह गया।

तापमान ने पांच डिग्री सेल्सियस का गोता लगाया। रविवार इस सर्दी का सबसे ठंडा दिन रहा। कोहरे से फसल को कोई नुकसान नहीं होता लेकिन पाला फसलों को नुकसान पहुंचाता है।
बीते सप्ताह का तापमान

दिन, न्यूनतम, अधिकतम
29 दिसंबर, 4.4, 19.0
30 दिसंबर, 4.9, 19.8
31 दिसंबर, 7.8, 20.4
01 जनवरी, 7.4, 17.4
02 जनवरी, 8.9, 14.2
03 जनवरी, 8.6, 14.2
04 जनवरी, 3.6, 16.6

(नोट: तापमान डिग्री सेल्सियस में है।)
पाले को फसल से बचाने के उपाय

  • फसलों की सिंचाई करें।
  • फसल में व्यावसायिक गंधक के तेजाब का 0.1 प्रतिशत का छिड़काव करें।
  • नर्सरी को रात में प्लास्टिक की चादर से ढ़क कर रखें।
  • फसल को ठंडी हवा से बचाने को मेढ़ के चारों ओर झाड़ी लगा दें।


रविवार को खेतों में पाला पड़ा है। पाला पड़ने से मौसम एकदम सुन्न हो जाता है। बादल छाए हुए हैं लेकिन बरसात होने की उम्मीद अब बहुत कम ही रह गई है।
सतीश कुमार, प्रेक्षक- मौसम वेधशाला नगीना

पाला फसलों को नुकसान होता है। इससे पौधे के अंदर जमा नमी बर्फ में बदल जाती है जिससे पौधे की काशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। इससे फसल की वृद्धि पर असर पड़ता है। सिंचाई आदि संसाधनों से पाले से बचा जा सकता है।
डा.केके सिंह, कृषि विज्ञानी- कृषि विज्ञान केंद्र नगीना

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