शनिवार को जमशेदपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में जानकारी देते पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने हेमंत सरकार द्वारा लागू किए गए पेसा कानून को आदिवासियों के साथ धोखा करार दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान पेसा नियमावली से ग्राम सभाएं सशक्त नहीं, बल्कि कमजोर होंगी। यह कानून आधा-अधूरा है और इससे पंचायतों व आदिवासी समाज को ठगा जा रहा है। चम्पाई सोरेन शनिवार को जमशेदपुर परिसदन में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 से पेसा कानून को लेकर आदिवासी समाज में आंदोलन होता रहा है, लेकिन जिस तरह से वर्तमान सरकार ने इसे लागू किया है, उससे आदिवासियों को कोई ठोस लाभ नहीं मिलने वाला। पारंपरिक रूढ़िवादी व्यवस्था और सामाजिक संरचना को दरकिनार कर यह कानून लाया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इससे अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आखिर क्या फायदा होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पेसा कानून को लागू करने से पहले आदिवासियों को संविधान की चौथी अनुसूची (फोर्थ शेड्यूल) में शामिल किया जाना चाहिए था। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मुद्दे को राज्यभर के आदिवासी समाज तक पहुंचाया जाएगा और पेसा कानून के वर्तमान स्वरूप के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
चम्पाई सोरेन ने ग्राम सभा के अधिकारों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शराब की दुकान खोलने के लिए ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य है, लेकिन खनन जैसे गंभीर मामलों में ग्राम सभा की सहमति जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कहां का न्याय है। चंपाई ने बताया कि लघु खनिजों पर भी ग्राम सभा का अधिकार सीमित कर दिया गया है। केवल छह हेक्टेयर बालू खनन तक ग्राम सभा को अधिकार दिया गया है, जो नाकाफी है। उन्होंने टाटा कंपनी के लीज नवीकरण पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि टाटा के कारण चांडिल डैम का निर्माण हुआ, जिससे कई आदिवासी विस्थापित हुए, लेकिन उन्हें आज तक उचित लाभ नहीं मिला। मिर्जाडीह डैम से पानी टाटा कंपनी को मिलेगा, लेकिन उससे होने वाले राजस्व पर ग्राम सभा का अधिकार क्यों नहीं दिया गया। चम्पाई सोरेन ने आरोप लगाया कि नई पेसा नियमावली के तहत राज्य की योजनाओं पर भी ग्राम सभा का अधिकार छीना जा रहा है। यदि किसी योजना पर 30 दिनों के भीतर ग्राम सभा निर्णय नहीं लेती है, तो उसे स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा, जो ग्राम सभा की भूमिका को औपचारिक बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि गांव में सरकारी तालाब होने के बावजूद ग्राम सभा को उससे होने वाली आय वसूलने का अधिकार नहीं दिया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों की स्थापना से सबसे अधिक विस्थापन आदिवासियों का ही होता है। लेकिन उनके अधिकारों और संसाधनों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने पेसा कानून में व्यापक संशोधन की मांग की। |
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