जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एमसीडी के कर्मचारियों और उनके आश्रितों को अब सरकारी अस्पतालों के इलाज पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। दिल्ली नगर निगम ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की तर्ज पर अपने कर्मचारियों के लिए एमसीडीईएसएच (एमसीडी कर्मचारी स्वास्थ्य योजना) लागू कर दी है।
जिसके बाद से एमसीडी के कर्मचारियों और अधिकारियों को प्राइवेट अस्पतालों में कैशलेस इलाज मिलेगा। जबकि पहले प्राइवेट अस्पतालों को एमसीडी द्वारा समय पर भुगतान न होने की वजह से यह व्यवस्था बंद कर दी थी। जिसकी वजह से एमसीडी के कर्मचारी दिल्ली सरकार के अस्पतालों और डिस्पेंसरियों पर ही इलाज के लिए निर्भर थे।
इस परियोजना के तहत एमसीडी के स्थायी कर्मचारियों को पूरी तरह से कैशलेस इलाज मिलेगा। साथ ही दवाओं और जांच के भुगतान को भी कैशलेस किया जाएगा। निगम सदन ने सितंबर 2025 में इस प्रस्ताव को पारित किया गया था। इसके बाद निगम ने इस योजना को एक जनवरी से लागू करने के आदेश दे दिया है। एमसीडी में करीब एक लाख स्थायी कर्मचारी हैं।
वर्तमान में सभी को मेडिकल की सुविधा तो मिल रही है, लेकिन कैशलेस इलाज नहीं मिल रहा है क्योंकि एमसीडी की खराब आर्थिक स्थिति के कारण अस्पतालों को समय से भुगतान नहीं मिल पाता था।
एमसीडी के पैनल में जो अस्पताल थे वह कैशेलेस इलाज से इनकार कर देते हैं। इस योजना को निगम ने निदेशक अस्पताल प्रशासन की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट के आधार लागू किया है। कमेटी ने इस योजना की जरुरत बताई थी।
एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नई एमसीडी कर्मचारी स्वास्थ्य योजना के तहत अंशदान के लिए अलग खाता होगा। इस खाते में जो मासिक अंशदान कर्मचारियों का आएगा उससे अस्पतालों और जांच लैब को भुगतान किया जाएगा।
जिससे कर्मचारियों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा में कोई परेशानी नहीं होगी, क्योंकि 70 प्रतिशत कर्मचारी स्वास्थ्य योजना का लाभ नहीं लेते हैं, केवल 30 प्रतिशत ही लाभ लेते हैं तो एक रोटेशन बन जाएगा। इससे अस्पतालों के भुगतान में कोई दिक्कत नहीं होगी। इस योजना के तहत एमसीडी अपने कर्मचारियों को मेडिकल कार्ड जारी रहेगी जिसमे कर्मचारी और आश्रितों का उल्लेख होगा।
निगम की खराब आर्थिक स्थिति नहीं बनेगी समस्या
पुरानी हेल्थ स्कीम के तहत एमसीडी के स्थायी कर्मचारियों से मासिक अंशदान तो लिया जाता था, लेकिन वह निगम के सामान्य खाते में जमा होता था। ऐस में अस्पतालों से जो कर्मचारियों के इलाज के लिए बिल आते थे उसी खाते से इसका भुगतान होता था। इस खाते में जो भी पैसा होता था उससे वेतन और पेंशन जैसे भी भुगतान भी होते थे।
लेकिन कई बार निगम की खराब आर्थिक स्थिति की वजह से कई बार अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं हो पाता था। जबकि नई स्कीम के तहत एक अलग से खाता खोला जाएगा। इसमें प्रत्येक स्थायी कर्मचारी से मासिक अंशदान इसी खाते में रखा जाएगा। इस खाते का उपयोग केवल इसी स्कीम के लिए किया जाएगा।
किस स्तर के कर्मचारी को कितना करना होगा मासिक अंशदान
सातवें वेतन आयोग के तहत स्तर
श्रेणी अंशदान (मासिक)
स्तर 1 से 5
250 रुपये
स्तर 6
450 रुपये
स्तर 7 से 11
650 रुपये
स्तर 12 या उससे अधिक
1000 रुपये
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