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मौनी अमावस्या 2026 : सुबह स्नान करने के पूर्व कुछ भी नहीं बोलें, जानिए तिथि और शुभ मुर्हूत

deltin33 2026-1-16 18:26:39 views 744
  

मौनी अमावस्या 2026 : आचार्य संपूर्णानंद ने दी जानकारी



डिजिटल डेस्क, भागलपुर। मौनी अमावस्या 2026 : माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। मौनी अमावस्या हिंदू सनातन धर्म में विशेष पुण्यदायी मानी गई है। ‘मौनी’ का अर्थ है-मौन धारण करने वाला। इस दिन मौन व्रत, पवित्र स्नान और दान द्वारा आत्मशुद्धि का विधान बताया गया है।
भगवान मनु ने मौन रहकर तप किया था

वेद विद्यापीठ गुरुधाम बौंसी के आचार्य सम्पूर्णानंद ने कहा पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान मनु ने मौन रहकर तप किया था। इसी कारण यह अमावस्या ‘मौनी’ कही गई। इस दिन गंगा, यमुना सहित अन्य पवित्र नदी अथवा संगम में स्नान करने का विशेष महत्व है। अगर यह सुविधा नहीं हो तो नहर, सरोवर, ताल, झील आदि में भी स्नान कर सकते हैं। लोग तीर्थ नहीं जा सकते, वे घर पर ही गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कर सकते हैं।
यह दिन काफी खास है

धर्मग्रंथों में कहा गया है- माघे मासि अमावास्या स्नानदानविशेषतः। सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥ अर्थात माघ मास की अमावस्या को स्नान और दान करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को प्राप्त करता है।
दान करने से विशेष पुण्य की होगी प्राप्ति

आचार्य सम्पूर्णानंद ने कहा कि मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद दान करने का विधान है। इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है। अन्न, वस्त्र, तिल, कंबल और घी का दान विशेष पुण्यकारी माना गया है। साथ ही पितरों के तर्पण से पितृ दोष शांति का भी विधान है। साथ ही ध्यान और मंत्र जप भी करें। गुरुदेव द्वारा दिए गए मंत्रों का जप करें। इस दिन जप करने वालों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। भगवान को याद करते रहें, उनका स्मरण करें।
2026 में यह पर्व 18 जनवरी को मनाया जाएगा

मौनी अमावस्या 18 जनवरी को है। माघ मास की अमावस्या को यह दिन आता है। इस दिन वाणी पर संयम, सात्विक आहार और सेवा भाव को अपनाने की परंपरा है। वाद-विवाद, क्रोध और असत्य से दूर रहना चाहिए। मौन से मन की चंचलता शांत होती है और आत्मचिंतन की शक्ति बढ़ती है।
क्या सीख देती है

आचार्य सम्पूर्णानंद ने कहा कि मौनी अमावस्या हमें यह सिखाती है कि जीवन में कभी-कभी बोलना छोड़कर सुनना, भागना छोड़कर ठहरना और दुनिया से हटकर स्वयं को समझना आवश्यक है। यह पर्व हमें आत्मसंयम, करुणा और साधना के मार्ग पर अग्रसर करता है। यदि मनुष्य वर्ष में एक दिन भी सच्चे भाव से मौन और सेवा को अपना ले, तो उसका जीवन निश्चित रूप से पवित्र और सफल बन सकता है।
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