जागरण संवाददाता, कानपुर। चकेरी के कारोबारी से 2.5 करोड़ की ठगी में पकड़े गए सात ठगों में सरगना आरिफ के साथी बिलाल के बैंक खाते में एक माह के भीतर 2.60 करोड़ रुपये पहुंचे थे।
ये रुपये तेलंगाना, गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बंगाल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु राज्य के ठगी के शिकार पीड़ितों के हैं, जिनकी शिकायतें उनके यहां दर्ज हैं।
साइबर क्राइम टीम ऐसे 96 बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिसमें कारोबारी की रकम ट्रांसफर हुई थी। आरिफ कंबोडिया व चीन के साइबर ठगों के गिरोह से जुड़ा था और उन्हें बैंक खाते भी उपलब्ध कराता था।
साइबर क्राइम थाना प्रभारी सतीश चंद्र यादव ने बताया कि लालबंगला के सफीपुर निवासी कारोबारी राहुल केसरवानी ने 17 दिसंबर को मुकदमा दर्ज कराया था। उनके अनुसार, मई में फेसबुक पर एक युवती की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई, जिसे स्वीकार किया था।
इसके बाद मोबाइल लेकर युवती वाट्सएप पर चैट करने लगी, फिर शेयर मार्केट में निवेश करने पर ज्यादा लाभांश मिलने का लालच दिया।
10 लाख रुपये बताए खाते में ट्रांसफर किए तो एप पर कुछ दिन में 26 लाख दिखने लगे, फिर युवती ने 50 लाख निवेश करने को कहा। मना करने पर युवती ने दोस्ती का हवाला देकर अपनी तरफ से 50 लाख निवेश करने की बात कही।
इसके बाद युवती का पिता बन एक ठग ने खुद को कर्नल बताते हुए बेटी को जाल में फंसाने की बात कह पुलिस आयुक्त को अपना दोस्त बता जेल भिजवाने की धमकी दी और छह माह में 2.40 करोड़ रुपये ठग लिए। जांच में पता चला कि कारोबारी की रकम में 50 हजार फीलखाना की एक बैंक में भी ट्रांसफर हुई थी।
उसका खाताधारक चटाई मोहाल का बिलाल निकला। उसे उठाकर पूछताछ में उसने पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। इसके बाद टीम ने जाजमऊ न्यू अंबेडकर नगर निवासी मो. आरिफ, उसका खास साथी बाबूपुरवा का ओसामा, मो. यूसुफ, सावेज, फैज और प्रयागराज के जीटीबी नगर कालोनी निवासी अल हुमैद दबोचे गए।
थाना प्रभारी ने बताया कि अब तक की जांच में एक और नई बात सामने आई। आरिफ का ही साथी खाताधारक बिलाह के बैंक खाते में नौ राज्यों के जिलों में ठगी का शिकार पीड़ितों के लगभग 2.60 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए थे।
कारोबारी के रुपये पहले 12 से ज्यादा बैंक खातों में ट्रांसफर हुए थे। इसमें से एक बिलाल का भी खाता था। उसके बाद 84 बैंक खातों में पहुंचे थे। अन्य सभी बैंक खातों की जांच भी चल रही है। आरिफ और उसका साथी ओसामा लोगों को खाते उपलब्ध कराने के लिए उनसे दोस्ती कर काफी रुपये खर्च करते थे। |