पाकिस्तान का एक और झूठ बेनकाब।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बुरी तरह से पटखनी खाने के बाद भी पाकिस्तान अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहा है। पहलगाम हमले के जवाब में हुए इस ऑपरेशन को लेकर वो एक बार फिर से झूठ फैला रहा है। उसने एक बार फिर सोशल मीडिया का सहारा लेकर अपनी हार को जीत में बदलने की नाकाम कोशिश की है।
पाकिस्तान से जुड़े कुछ सोशल मीडिया अकाउंट भ्रामक और बिना पुष्टि वाली सैटेलाइट तस्वीरें साझा करके झूठा दावा कर रहे हैं कि इस दौरान भारत के अमृतसर में हमले किए गए। हालांकि, ये दावे तथ्यों से परे हैं।
पाकिस्तान के दावा क्यों है सफेद झूठ?
दरअसल, उसने जो तस्वीरें शेयर की हैं उसमें बताए गए टारगेट पर साफ तौर पर दिख रहा है कि वहां पर तबाही या नुकसान नहीं हुआ है। पोस्ट में बताई गई भारतीय मिलिट्री फैसिलिटीज सही-सलामत हैं और उनमें ब्लास्ट के असर, स्ट्रक्चरल नुकसान या ऐसे असर के कोई संकेत नहीं हैं जो हवाई या मिसाइल हमले से होने चाहिए थे।
एनालिस्ट्स का कहना है कि तस्वीरों में हमले के कोई भरोसेमंद संकेत नहीं हैं, जैसे कि गड्ढे, मलबा, जलने के निशान, या गिरी हुई इमारतें। इस नए दुष्प्रचार अभियान की टाइमिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्यों हो रहे सवाल खड़े?
मई में असल लड़ाई के दौरान पाकिस्तान भारतीय मिलिट्री ठिकानों पर हमला करने के अपने दावों को साबित करने के लिए कोई भरोसेमंद सैटेलाइट इमेज या कोई सबूत पेश नहीं कर पाया था। सात महीने बाद इन विज़ुअल्स का अचानक सामने आना यह नतीजा निकालने पर मजबूर करते हैं कि यह सामग्री असली डॉक्यूमेंटेशन पेश करने के बजाय सबूत बनाने की बाद की कोशिश है।
ऐसा पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने झूठ गढ़ा है। इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके तुरंत बाद पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर काल्पनिक जीत की कहानी कही जा चुकी है और बेनकाब भी हो चुकी है।
विश्लेषकों का कहना है कि इन नई तस्वीरों जानबूझकर सीमित हिस्से दिखाए गए और हमले के कोई साफ संकेत नहीं मिलते हैं। उसी जगह की पुरानी तस्वीर से तुलना करने पर कोई बदलाव भी नजर नहीं आता है।
भारत ने बताई सच्चाई
भारत ने अपनी तरफ से यह कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के किसी भी हमले से उसके मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को कोई नुकसान नहीं हुआ। पंजाब में अमृतसर के पास की जगहें सुविधाओं की लगातार ऑपरेशनल तैयारी और सही हालत इस बात का समर्थन करती है। इस क्षेत्र के बाहर के एनालिस्ट और ऑब्जर्वर द्वारा किए गए स्वतंत्र आकलन भी इसी नतीजे पर पहुंचे हैं।
सोशल मीडिया पर हालिया कैंपेन बिना वेरिफाई की गई तस्वीरों और पुरानी प्रोपेगेंडा पर आधारित है जो स्वतंत्र जांच में टिक नहीं पाता। एनालिस्ट चेतावनी देते हैं कि यह घटना गलत जानकारी फैलाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल को दिखाती है।
यह भी पढ़ें: \“पाकिस्तान को उखाड़ फेंको, हम भारत के साथ\“; PAK से किसने लिखा जयशंकर को ओपन लेटर? |