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Jharkhand सभी औद्योगिक इकाइयों का उद्योग विभाग में पंजीयन अनिवार्य, होम गार्ड्स को ईपीएफ देने के मामले में हाई कोर्ट ने दिया आदेश

deltin33 2025-12-21 02:36:53 views 1232
  

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और उद्योग विभाग पर कर्मचारी भविष्य निधि कानून के क्रियान्वयन में लगातार लापरवाही पर नाराजगी जताई है।



राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने एक मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और उद्योग विभाग पर कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) कानून के क्रियान्वयन में लगातार लापरवाही पर नाराजगी जताई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

अदालत ने राज्य में संचालित सभी औद्योगिक इकाइयों को 30 जून 2026 तक उद्योग विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है, चाहे उनकी प्रकृति या कर्मचारियों की संख्या कुछ भी हो।

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि राज्य की सभी औद्योगिक इकाइयों को 30 जून 2026 तक उद्योग विभाग में पंजीकरण कराना होगा। उक्त तिथि तक पुरानी कंपनियों को पंजीयन कराना है।

इसके अलावा नई कंपनियों को पंजीयन प्रारंभ में ही कराना होगा। अदालत ने उद्योग विभाग के निदेशक को यह आदेश सभी संबंधित विभागों और उद्योगों तक भेजने का निर्देश दिया है। मामले अगली सुनवाई 30 जनवरी को होगी।

  

इसको लेकर पंकज कुमार की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गई थी। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज ने अदालत को बताया था कि होम गार्ड्स को ईपीएफ का लाभ नहीं दिया जा रहा है। जबकि ऐसा करना अनिवार्य है।
कोर्ट ने जताई थी राज्य की लापरवाही पर गंभीर आपत्ति

सुनवाई के दौरान उद्योग विभाग के निदेशक कोर्ट में उपस्थित हुए थे। कोर्ट ने राज्य की लापरवाही पर गंभीर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों को ईपीएफ का लाभ देने में देरी हो रही है।

ठेका, दैनिक मजदूर और आकस्मिक कर्मचारियों को ईपीएफ लाभ देने का प्रस्ताव वित्त विभाग की स्वीकृति के लिए भेजा गया था, लेकिन चार महीने बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई। अदालत ने पूर्व में होम गार्ड्स को ईपीएफ का लाभ देने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया गया था।

लेकिन केवल एक समिति गठित की गई, जबकि यह राज्य सरकार का कानूनी दायित्व है। इस दौरान अदालत ने क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त को उद्योग विभाग द्वारा पंजीकृत इकाइयों की पूरी सूची नहीं दी गई।

इससे ईपीएफ के दायरे में आने वाली इकाइयों की पहचान करना मुश्किल हो गया। कोर्ट को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि पूरे झारखंड राज्य में केवल 1324 औद्योगिक इकाइयां उद्योग विभाग में पंजीकृत हैं।

इनमें से मात्र 231 इकाइयां ही ईपीएफ अधिनियम के दायरे में पाई गईं। उद्योग विभाग ने बताया कि अब तक यह पंजीकरण अनिवार्य नहीं था, लेकिन अब इसे अनिवार्य बना दिया गया है।

उद्योग विभाग के निदेशक विशाल सागर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। इस पर अदालत ने उनके खिलाफ चल रही अवमानना की कार्रवाई को निरस्त कर दिया और उनको व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान कर दी।
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