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दवा या धोखा? समस्तीपुर में मरीजों की जान से खेल, दो कंपनियां ब्लैकलिस्ट

deltin33 2025-12-20 03:37:16 views 1234
  

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।  



प्रकाश कुमार, जागरण, समस्तीपुर । राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता एवं ससमय आपूर्ति को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार किया है।

बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कारपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) के प्रबंध निदेशक डा. निलेश रामचंद्र डेयरे ने दो दवा कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। इसमें पटना स्थित मेसर्स क्रास फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को आपूर्ति की गई डिक्लोफेनाक सोडियम गैस्ट्रो-रेजिस्टेंट टैबलेट 50 एमजी की गुणवत्ता मानकों पर खड़ा नहीं उतरने के कारण कार्रवाई की गई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

जबकि, विटामिन सी टैबलेट आईपी 500 एमजी की आपूर्ति में लगातार विफल रहने के आरोप में मेसर्स रिलीफ बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड को भी दो वर्ष के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया है। यह कार्रवाई निविदा शर्तों के उल्लंघन एवं बार-बार नोटिस देने के बावजूद आपूर्ति नहीं करने के कारण की गई है।

बीएमएसआईसीएल के अनुसार, निगम द्वारा कराई गई पोस्ट-शिपमेंट गुणवत्ता जांच में डिक्लोफेनाक सोडियम गैस्ट्रो-रेजिस्टेंट टैबलेट दवा के तीन बैच निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। जांच में सामने आया कि दवा डिसाल्यूशन जांच में असफल रही, जिसे एनएसक्यू (नाट आफ स्टैंडर्ड क्वालिटी) घोषित किया गया।

संबंधित दवाएं पटना, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया स्थित बीएमएसआईसीएल के वेयरहाउस में सप्लाई की गई थी। गुणवत्ता जांच रिपोर्ट आने के बाद बीएमएसआईसीएल ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

कंपनी की ओर से दवा के पुनः परीक्षण का दावा किया गया, लेकिन कोई वैध या अधिकृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। निगम ने इसे गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर गंभीर लापरवाही माना और निविदा शर्तों के तहत कड़ी कार्रवाई की है।

बीएमएसआईसीएल ने स्पष्ट किया कि दवाओं की जांच भारतीय फार्माकोपिया (आईपी) के मानकों के अनुसार, निगम से सूचीबद्ध प्रयोगशालाओं द्वारा की जाती है। जांच प्रक्रिया ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और उसके तहत बने नियमों के अनुरूप होती है, जिससे रिपोर्ट कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य होती है।

आदेश के तहत कंपनी की संबंधित दवा के लिए जमा सिक्योरिटी राशि जब्त की जाएगी। इसके अलावा उक्त उत्पाद से जुड़े सभी अपूर्ण और लंबित खरीद आदेश रद कर दिया गया हैं।

ब्लैक लिस्ट की अवधि में कंपनी राज्य में इस दवा की आपूर्ति नहीं कर सकेगी। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी किसी दवा या आपूर्तिकर्ता के मानक पर खरा न उतरने पर इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी।  
85 लाख यूनिट की आपूर्ति नहीं करने पर हुई कार्रवाई

बीएमएसआईसीएल ने विटामिन सी टैबलेट की आपूर्ति में लगातार विफल रहने के आरोप में मेसर्स रिलीफ बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड पर कार्रवाई की है। निगम ने संबंधित फर्म को वर्ष 2025 में विटामिन सी टैबलेट की कुल 85 लाख यूनिट की आपूर्ति के लिए कई क्रय आदेश जारी किया था।

लेकिन कंपनी ने एक भी आपूर्ति नहीं की। इस संबंध में कंपनी तीन बार स्पष्टीकरण किया गया। फर्म की ओर से न तो कोई संतोषजनक जवाब दिया गया और न ही दवा की आपूर्ति की गई। इसके अलावा मधेपुरा स्थित जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कालेज एवं अस्पताल तथा पटना के नालंदा मेडिकल कालेज एवं अस्पताल से प्राप्त शिकायतों में दवा की गुणवत्ता में गंभीर खामियां सामने आई।

रिपोर्ट के अनुसार विटामिन सी टैबलेट की स्ट्रिप खोलने पर टैबलेट पाउडर में बदल जा रही थी, जिसे ड्रग क्वालिटी स्टैंडर्ड के खिलाफ पाया गया।

निविदा की क्लाज 27 (ए) और 27 (सी) के तहत कार्रवाई करते हुए संबंधित दवा के लिए फर्म को दो वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। साथ ही लंबित क्रय आदेशों को रद करते हुए उस उत्पाद के लिए किया गया दर अनुबंध भी समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा फर्म की सुरक्षा जमा राशि जब्त करने का भी निर्णय लिया गया है।

बीएमएसआईसीएल ने स्पष्ट किया कि दवा की आपूर्ति में इस तरह की लापरवाही से राज्य के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने की योजना प्रभावित हो रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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