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Raat Akeli Hai 2 Review: अंत तक नहीं लगा पाएंगे कातिल का पता, सॉलिड मिस्ट्री के बाद भी कहां रह गई कमी?

deltin33 2025-12-19 20:07:30 views 673
  

रात अकेली है : द बंसल मर्डर्स रिव्यू/ फोटो- Jagran Graphics



प्रियंका सिंह, मुंबई। पांच साल बाद जटिल यादव एक नए केस के साथ फिर लौट आया है। साल 2020 में रिलीज हुई फिल्म रात अकेली है फ्रेंचाइज की दूसरी फिल्म रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स (Raat Akeli Hai 2 review Netflix) नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
कैसे आगे बढ़ी मर्डर मिस्ट्री फिल्म की कहानी?

रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स (Raat Akeli Hai 2 plot twists) उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित अखबार के मालिक बंसल परिवार के साथ शुरू होती है, जो अपने फार्महाउस पर जमा हैं। वहां मीरा (चित्रांगदा सिंह) के बेटे की बरसी को लेकर उनके परिवार की गुरु मां (दीप्ति नवल) की पूजा पाठ चल रही है। घर के बाहर अचानक से कई पक्षी मरे पाए जाते हैं। जांच में पता चलता है कि कुछ लोग उनके घर में घुसे थे, जिन्होंने इस काम को अंजाम दिया है। पुलिस इंस्पेक्टर जटिल यादव को बुलाया जाता है। उसके कुछ दिन बाद बंसल परिवार में कई सारे कत्ल एक ही रात में हो जाते हैं। मीरा पर शक जाता है। पुलिस जांच शुरू होती है। कातिल का पता लगाने के लिए फिल्म देखनी होगी।

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अंत तक नहीं सुलझा पाएंगे ये गुत्थी

स्मिता सिंह की लिखी यह कहानी थ्रिलर ड्रामा और मर्डर मिस्ट्री के जोनर में सही बैठती है, जिसमे वाकई अंत तक अंदाजा नहीं लगता है कि कातिल कौन है। हालांकि, स्मिता के पास कहानी को थोड़ा और रहस्यमयी बनाने का मौका था, कई जगहों पर कहानी सपाट भी हो जाती है। हनी ने मूल फिल्म का भी निर्देशन किया था। उनकी पकड़ निर्देशन और बाकी सभी कलाकारों पर मजबूत दिखी, लेकिन पुलिस जांच के लिए जानी जाने वाली यह फिल्म वहीं पर थोड़ी कमजोर भी दिखी।

जटिल का पात्र फारेंसिक टीम की डॉक्टर पनीकर (रेवती आशा केलुन्नी) के साथ मिलकर कातिल का पता लगाने के लिए जी जान लगा देता है, लेकिन डीजीपी समीर वर्मा (रजत कपूर) इस केस को बिना ज्यादा जांच किए केवल निपटाने की कोशिश क्यों करता है, समझ से परे है। सारे सबूत होने के बाद वह क्यों कहता है कि थोड़ा डिटैचमेंट (केस से अलग होकर) से काम करना सीखो। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के अनुसार सटीक है। सीर्षा रे की सिनेमैटोग्राफी और एडिटर तान्या छाबड़िया इस फिल्म को वह टोन और एडिट देते हैं, जो ऐसी थ्रिलर फिल्मों को रहस्यमयी और रोमांचक बनाने के लिए आवश्यक हैं।

  
नवाजुद्दीन ने बिना हीरोगिरी दिखाए किरदार में भरी जान

अभिनय की बात करें तो नवाजुद्दीन सिद्दीकी(Nawazuddin Siddiqui mystery film), जटिल यादव की जटिलता को बड़ी ही सहजता से निभा जाते हैं। पुलिस के पात्र को बिना हीरो बनाए, उसे वास्तविकता के करीब रखते हैं, जो घर में मां के सामने आदर्शवादी बेटा है, लेकिन फील्ड पर सख्त पुलिस इंस्पेक्टर। चित्रांगदा सिंह ने स्क्रिप्ट के दायरों में रहकर मीरा के परतदार पात्र को बखूबी निभाया है, हालांकि उनका रोल थोड़ा और बेहतर लिखा जा सकता था।

दीप्ति नवल गुरू मां की भूमिका और लुक में चौंकाती हैं। डा. पनीकर के रोल में रेवती आशा केलुन्नी याद रह जाती हैं। रजत कपूर अच्छे अभिनेता हैं, इसलिए आधे-अधूरे से लिखे पात्र को भी वह शिद्दत से निभा जाते हैं। ईला अरुण जटिल की मां के रोल में मजेदार हैं। छोटी सी भूमिका में संजय कपूर और राधिका आप्टे का काम ठीक है।

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