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सर्दियों में बढ़ी अंडों की डिमांड...डेढ़ गुना बढ़े दाम, इन तरीकों से करें सही अंडे की पहचान

cy520520 2025-12-19 19:37:23 views 1240
  

प्रतीकात्मक तस्वीर



जागरण संवाददाता, गाजीपुर। ठंड के मौसम में अंडों की मांग जिले में चार गुना बढ़ गई है। जिले में चार बड़े रजिस्टर्ड पोल्ट्री फार्म प्रतिदिन करीब एक लाख अंडे का उत्पादन करते हैं, जो जिले की बढ़ती मांग को केवल आंशिक रूप से ही पूरा कर पाते हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

मांग पूरी करने के लिए शहर के छह बड़े व्यापारी और तहसील स्तर पर लगभग एक दर्जन व्यापारी बाहर के प्रदेशों और जिलों से अंडे मंगवाते हैं।

बाहरी आपूर्ति आमतौर पर ट्रक के माध्यम से होती है। एक मानक सेमी-ट्रेलर में लगभग 800 से 1000 पेटी अंडे हो सकते हैं, जिसमें हर पेटी में 30 दर्जन अंडे यानी लगभग 360 अंडे होते हैं। ऐसे अनुमान के अनुसार प्रतिदिन जिले में स्थानीय उत्पादन के साथ बाहरी आपूर्ति मिलाकर लगभग दो ट्रक की खपत होती है।

कुल मिलाकर प्रतिदिन दो लाख से अधिक अंडे का सेवन होता है, जिससे ठंड के दौरान कीमतें डेढ़ गुना तक बढ़ गई है। यही अंडा गर्मी के दिनों में 1050 रुपये पेटी बिकता था, जो अब 1570 रुपये पेटी बिक रहा है।

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स्वास्थ्य और सुरक्षा पर सख्त निगरानी

उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शासन ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसएसएआई) को सख्त निर्देश दिए हैं। इसके तहत ब्रांडेड और खुले बाजार दोनों तरह के अंडों की नियमित सैंपलिंग और लैब जांच कराई जाएगी। साथ ही अंडा उत्पादकों और कारोबारियों को प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान के माध्यम से प्रतिबंधित एंटीबायोटिक नाइट्रोफ्यूरन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी।

नाइट्रोफ्यूरन का अवैध इस्तेमाल अंडों में सीधे मानव शरीर में पहुंच सकता है। लंबे समय तक इसका सेवन कैंसर, लिवर की समस्या, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी और बच्चों के शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

जागरूकता व प्रशिक्षण अभियान
एफएसएसएआई के निर्देश के तहत जिले में पोल्ट्री फार्म, अंडा संग्रह केंद्र, थोक विक्रेता और खुदरा बाजार से नमूने लिए जाएंगे। प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम के जरिए कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी।

सहायक आयुक्त रमेश चंद्र पांडेय ने बताया कि उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे केवल पंजीकृत और विश्वसनीय विक्रेताओं से ही अंडे खरीदें और संदिग्ध या बेहद सस्ते स्रोतों से आने वाले अंडों से बचें। बच्चों के आहार में अंडों का उपयोग करते समय विशेष सावधानी बरतें। उत्पादकों व विक्रेताओं को नाइट्रोफ्यूरन के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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