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सहरसा लौटी भारत गौरव तीर्थ यात्रा स्पेशल ट्रेन, यात्रियों ने दिल खोलकर की रेलवे की प्रशंसा

LHC0088 2025-12-19 14:37:29 views 1237
  

भारत गौरव स्पेशल तीर्थ यात्रा ट्रेन। (जागरण)



संवाद सूत्र, सरायगढ़ (सुपौल)। रेलवे द्वारा आम लोगों, विशेषकर बुजुर्ग तीर्थ यात्रियों को देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों का सुलभ और सुविधाजनक दर्शन कराने के उद्देश्य से चलाई गई भारत गौरव स्पेशल तीर्थ यात्रा ट्रेन गुरुवार 18 दिसंबर को लंबी यात्रा पूरी कर वापस सहरसा लौटी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस ट्रेन में विभिन्न जिलों से कुल लगभग 700 तीर्थ यात्री सवार थे, जिन्होंने देश के कई प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों का भ्रमण किया।
जानकारी के अनुसार, भारत गौरव तीर्थ यात्रा ट्रेन ने 5 दिसंबर को सहरसा रेलवे स्टेशन से अपनी यात्रा की शुरुआत की थी। इस दौरान ट्रेन यात्रियों को दक्षिण भारत सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दर्शन कराया गया।

तीर्थ यात्रा का प्रमुख पड़ाव त्रिवेंद्रम रहा, जहां यात्रियों ने धार्मिक स्थलों के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुभव भी प्राप्त किया।

गुरुवार को जब ट्रेन सरायगढ़ रेलवे जंक्शन पहुंची तो यात्रियों के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। ट्रेन में सवार तीर्थ यात्रियों ने बताया कि वे 13 दिसंबर को त्रिवेंद्रम से वापसी के लिए रवाना हुए थे और 18 दिसंबर को यात्रा पूर्ण कर अब सहरसा लौट रहे हैं।

यात्रियों ने कहा कि पूरी यात्रा के दौरान रेलवे प्रशासन द्वारा भोजन, ठहराव, सुरक्षा, स्वच्छता और मार्गदर्शन की बेहतरीन व्यवस्था की गई थी।
खुले दिल से की सराहना

इस यात्रा में शामिल अधिकांश यात्री बुजुर्ग थे, जिन्होंने रेलवे विभाग की इस पहल की खुले दिल से सराहना की। यात्रियों का कहना था कि भारत गौरव तीर्थ यात्रा ट्रेन उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं रही।

सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए इस तरह की यात्रा व्यक्तिगत रूप से करना कठिन होता है, लेकिन रेलवे की इस योजना से उन्हें एक साथ कई बड़े तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर मिला।

तीर्थ यात्रियों ने यह भी कहा कि ट्रेन में तैनात रेलवे कर्मी और सहायक स्टाफ पूरे सफर के दौरान हमेशा तत्पर और सहयोगी रहे। किसी भी समस्या पर तुरंत समाधान किया गया, जिससे यात्रियों को कहीं भी असुविधा नहीं हुई।

यात्रियों ने मांग की कि भारत गौरव तीर्थ यात्रा ट्रेन का संचालन आगे भी नियमित रूप से किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के अधिक से अधिक श्रद्धालु देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन कर सकें।
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