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अब नहीं बहेगा वीकनपुर पुल! IIT रुड़की के प्लान से बदलेगी रामगंगा की दिशा, 30 किमी का चक्कर होगा खत्म

deltin33 2025-12-19 05:06:30 views 1052
  

वीकनपुर पुल



जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मूंढापांडे क्षेत्र में रामगंगा नदी पर बने वीकनपुर पुल की एप्रोच रोड को लेकर अब स्थायी समाधान की दिशा में काम होने लगा है। रामगंगा की धारा बदलकर ही एप्रोच रोड को बचाया जाएगा। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के निर्माण खंड एक ने रामगंगा नदी की धारा में आंशिक परिवर्तन कर एप्रोच रोड को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की 24 करोड़ रुपये की विस्तृत कार्ययोजना शासन को भेजी है। जल्द ही इसके लिए धनराशि स्वीकृत होने की उम्मीद है। एप्रोच रोड बनते ही रास्ता खोल दिया जाएगा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

12 सितंबर 2024 को आई भीषण बाढ़ में मूंढापांडे ब्लाक के ग्राम वीकनपुर में रामगंगा (रजेड़ा) नदी पर बना यह पुल बुरी तरह प्रभावित हुआ था। एप्रोच रोड पूरी तरह बह जाने से क्षेत्र के दर्जनों गांवों का आवागमन बाधित हो गया है। बाढ़ के दौरान पानी के तेज बहाव से पुल की एप्रोच रोड पूरी तरह कट गई थी, जिससे दर्जनों गांवों का सीधा संपर्क टूट गया।

स्थानीय लोगों को मजबूरी में 30 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ा। पहले चरण में पुल की एप्रोच रोड को तत्काल बहाल करने के लिए करीब 4.45 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे शासन से स्वीकृति भी मिल गई थी हालांकि, इसे स्थायी समाधान नहीं माना गया। इसी बीच आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञों की टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब ढाई घंटे तक गहन निरीक्षण किया और स्पष्ट किया कि केवल एप्रोच रोड बनाना पर्याप्त नहीं होगा।

टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रामगंगा नदी की धारा पुल की ओर मुड़ जाने के कारण तेज कटाव हो रहा है, जिससे भविष्य में भी यही स्थिति दोहराई जा सकती है। हालात की गंभीरता को देखते हुए शासन ने पुल के सर्वे और तकनीकी अध्ययन के लिए लोक निर्माण विभाग को 31 लाख रुपये की धनराशि जारी की थी।

इसके बाद आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञ अवधेश पांडेय और कमल कंसल ने अपनी टीम के साथ स्थलीय निरीक्षण किया।आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में सुझाव दिया गया कि पुल की लंबाई बढ़ाने की जरूरत नहीं है, बल्कि नदी की धारा को नियंत्रित और आंशिक रूप से मोड़कर मौजूदा पुल को सुरक्षित रखा जा सकता है।

इसी सुझाव के आधार पर लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड-एक, मुरादाबाद ने 24 करोड़ रुपये का नया एस्टीमेट तैयार किया है। इस योजना में नदी की धारा परिवर्तन, एप्रोच रोड का मजबूतीकरण, तटबंध सुरक्षा और अन्य आवश्यक संरचनात्मक कार्य शामिल हैं।

निर्माण खंड-एक के अधिकारियों का कहना है कि यदि 24 करोड़ की योजना को मंजूरी मिल जाती है तो भविष्य में बाढ़ के दौरान भी पुल और उसकी एप्रोच रोड सुरक्षित रहेगी। इससे न सिर्फ क्षेत्र का आवागमन सुगम होगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। शासन स्तर पर प्रस्ताव लंबित है, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से जल्द स्वीकृति की उम्मीद जताई जा रही है।
30 किमी. सफर तय करके पहुंचते हैं घर

पुल की एप्रोच रोड कटने के कारण दूसरी ओर बसे गांवों के लोगों को पंडित नगला होते हुए करीब 30 किलोमीटर लंबा और असुविधाजनक रास्ता अपनाना पड़ता है। खासकर बाढ़ के समय यह समस्या और भी विकराल हो जाती है। स्थानीय ग्रामीणों, व्यापारियों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। इन्हीं सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों को आधार बनाकर अब शासन को स्थायी समाधान की डीपीआर भेजने की तैयारी है।

  


  

वीकनपुर पुल की एप्रोच रोड को स्थायी और सुरक्षित बनाने के लिए आइआइटी रुड़की की डीपीआर के आधार पर 24 करोड़ रुपये की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी गई है। इसमें नदी की धारा नियंत्रण और एप्रोच मजबूती के सभी तकनीकी पहलू शामिल हैं। स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू कराया जाएगा।

- मोहित कुमार, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड-एक, मुरादाबाद


  


  

मैं मुख्यमंत्री जी से मिलकर वीकनपुर पुल की एप्रोच रोड की पूरी कार्ययोजना सौंप आया हूं। इसके लिए लगातार प्रयास कर रहा हूं। क्षेत्र के लोगों की परेशानी को देखते हुए सकारात्मक आश्वासन मिला है। उम्मीद है कि जल्द ही धनराशि स्वीकृत होगी और काम शुरू होकर जनता को बड़ी राहत मिलेगी।

- ठाकुर रामवीर सिंह, विधायक, कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र, मुरादाबाद





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