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भागलपुर में टेंडर के बाद जिला परिषद की राजनीति गरमाई, विरोध में डीएम-कमिश्नर से मिलेंगे 21 पार्षद

Chikheang 2025-11-24 02:37:08 views 591
  

एक होटल में एकजुटता दिखाते पूर्व जिप अध्यक्ष और पार्षदगण। (जागरण)



जागरण संवाददाता, भागलपुर। नाथनगर के नवनिवार्चित विधायक मिथुन कुमार के जिला परिषद के अध्यक्ष की कुर्सी पर बने रहने को लेकर राजनीति गरमाई हुई है।

अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं देने से विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्ष त्यागपत्र की मांग पर अड़ा है। समर्थक भी अब त्यागपत्र की मांग करने लगे हैं। गत दिनों अध्यक्ष के क्षेत्र में होने वाले कार्य से संबंधित हुए टेंडर पर भी पार्षदों ने सवाल खड़े किए हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

वहीं, मिथुन कुमार ने कहा कि टेंडर नियमपूर्वक हुआ है। अभी हमने अध्यक्ष पद से त्यागपत्र नहीं दिया है। पूर्व में प्रशासनिक स्वीकृति हो गई है। इसके बाद टेंडर निकाला गया है।

जिला अभियंता भूपेश कुमार सिंह का कहना है कि छह अक्टूबर को टेंडर हुआ था। कुछ कारणवश टेंडर को रद किया गया था। अब रीटेंडर हुआ है। नियमसंगत टेंडर किया गया है।

जिला परिषद अध्यक्ष सह नाथनगर के विधायक मिथुन कुमार ने कहा है कि अभी उन्होंने विधायक पद की शपथ नहीं ली है। अभी भी वे जिला परिषद अध्यक्ष हैं। उनके क्षेत्र में विकास कार्य के लिए जो टेंडर हुआ है, वह नियम संगत है। पूर्व में प्रशासनिक आदेश होने के कारण टेंडर हुआ है। कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।

उन्होंने कहा है कि कोई भी जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की विकास चाहता है। जनता भी विकास चाहती है। विकास का काम होना चाहिए। इधर, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष अनंत कुमार उर्फ टुनटुन साह ने रविवार को 21 पार्षदों के साथ फिर से एकजुटता दिखाई है।

सोमवार को 21 पार्षद कमिश्नर, डीएम व डीडीसी से मिलकर अध्यक्ष पद का चुनाव होने तक योजना व किसी भी प्रकार के पेमेंट पर रोक लगाने की मांग करेंगे।
पद से दे देना चाहिए त्यागपत्र

पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष टुनटुन साह ने कहा है कि विधायक बनने के बाद मिथुन कुमार को अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए। अध्यक्ष पद से त्यागपत्र नहीं देने की वजह से जिला परिषद का सारा काम रुक गया है। जिला परिषद अध्यक्ष मिथुन कुमार के एक सहयोगी ने बताया कि उन्होंने मैसेज भेजकर अध्यक्ष को त्यागपत्र देने का अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद को लेकर विवाद होने की वजह से कार्य होने के बाद भी पेमेंट रुका हुआ है। कार्य पूरा होने के बाद भी पेमेंट नहीं हुआ है। इसके कारण संबंधित ठेकेदार को परेशानी हो रही है।

एक वरीय पार्षद का कहना है कि पिछले चार साल में मात्र एक करोड़ का काम क्षेत्र के लिए मिला है। भारी भरकम कमीशन की वजह से विकास कार्य ठीक से नहीं हो पा रहा है। एक कर्मचारी ने बताया कि जिला परिषद में विवाद चल रहा है। काम को लेकर दबाव बनाया जा रहा है।
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