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बिहार के रिहायशी इलाके में पहुंची बाघिन, पश्चिम चंपारण में मक्के के खेत में मिले पगमार्क से दहशत

deltin33 2 hour(s) ago views 774
  

West Champaran Tiger Alert: गांव के लोग सहमे हुए हैं और रात के समय बाहर निकलना बंद कर दिया है। फाइल फोटो  



संवाद सूत्र, मैनाटांड़ (पश्चिम चंपारण)। Tiger In Residential Area: पश्चिम चंपारण जिले के मानपुर थाना क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब बिरंची तीन गांव से सटे मक्के के खेत में बाघिन के पगमार्क पाए गए। खेत में बाघिन के पदचिन्ह दिखने के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और लोग खेतों की ओर जाने से कतरा रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार की शाम संजय केसरी के घर के बगल में स्थित दिनेश मजूमदार के मक्के के खेत में बड़े आकार के पगमार्क दिखाई दिए। पदचिन्हों को देखकर ग्रामीणों को आशंका हुई कि जंगल से भटककर बाघिन रिहायशी क्षेत्र के सरेह तक पहुंच गई है। इसके बाद से गांव के लोग सहमे हुए हैं और रात के समय बाहर निकलना बंद कर दिया है।

बाघिन की आशंका के कारण किसानों की खेती पर भी असर पड़ रहा है। गेहूं, मक्का और सब्जी की फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वे न सिर्फ बाघ के डर से खेतों में नहीं जा पा रहे हैं, बल्कि नीलगाय और हिरण जैसे जंगली जानवरों से भी फसलों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं। पानी के अभाव में मक्के की फसल खराब होने की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सूचना देने पर वनकर्मी मौके पर जांच कर लौट जाते हैं, लेकिन स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जाती। किसानों ने मांग की है कि पटवन के समय वन विभाग के कर्मी खेतों के आसपास मौजूद रहें, ताकि वे बिना डर के खेती कर सकें।

इस मामले में मानपुर वन क्षेत्र के रेंजर हिमांशु कुमार ने बताया कि खेत में मिले पदचिन्हों की जांच की गई है और यह स्पष्ट हुआ है कि वे बाघिन के हैं। उन्होंने कहा कि जंगली जानवर अक्सर भोजन या गंध के कारण जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में निकल आते हैं।

फिलहाल बाघिन वापस जंगल की ओर लौट गई है। एहतियात के तौर पर वनकर्मी लगातार गश्त कर रहे हैं और ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है कि वे खेतों में अकेले न जाएं।

गौरतलब है कि बीते 28 जनवरी को मानपुर थाना क्षेत्र के पुरैनिया गांव के पश्चिम दोरहम नदी के किनारे एक बाघ का शव मिला था, जिसकी मौत करंट लगने से हुई थी। उस घटना के बाद से इलाके में पहले से ही भय का माहौल है। पुरैनिया गांव की दूरी बिरंची तीन गांव से महज डेढ़ किलोमीटर होने के कारण ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।

    
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