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आपकी Salary Slip में छिपी होती हैं 5 बड़ी बातें, इन्हें जान लिया तो हो सकती है हजारों की बचत; एक्सपर्ट से समझें

deltin33 2025-11-20 21:37:08 views 1232
  

आपकी Salary Slip में छिपी होती हैं 5 बड़ी बातें, इन्हें जान लिया तो हो सकती है हजारों की बचत; एक्सपर्ट से समझें



Salary slip hidden details: अगर आप नौकरी करते हैं तो हर महीने आपकी सैलरी आती है और हर महीने जनरेट होती है सैलरी स्लिप। जिसमें आपकी सैलरी का पूरा हिसाब-किताब होता है। लेकिन उसमें भरे शॉर्ट फॉर्म, नंबर और कटौतियां देखकर ज्यादातर लोग उसे बस स्क्रॉल करके छोड़ देते हैं। सैलरी स्लिप में आपकी कमाई, अलाउंस और PF-ESI जैसी बातें तो दिखती हैं, लेकिन इनके पीछे कई ऐसी जानकारियां भी छिपी होती हैं, जो आपकी जेब और टैक्स प्लानिंग पर बड़ा असर डालती हैं। अगर आप इन्हें समझ लें, तो महीने की सैलरी का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं और टैक्स (understand salary slip for tax saving) भी बचा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि आपकी सैलरी स्लिप टैक्स को लेकर कौन-सी 5 अहम बातें नहीं बताती और जिन्हें आपका जानना बेहद जरूरी है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
1. हर अलाउंस टैक्स-फ्री नहीं होता (Not All Allowances Are Tax-Free)

salary slip allowances explained: आपकी सैलरी स्लिप में हाउस रेंट अलाउंस (HRA), लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA), स्पेशल अलाउंस या कन्वीनियंस अलाउंस दिखता जरूर है, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि इनका कितना हिस्सा वास्तव में टैक्स से छूट वाला है। जैसे- HRA में छूट तभी मिलती है, जब आप किराया देते हों और नियम पूरे करते हों। इसी तरह LTA सिर्फ भारत में असली यात्रा पर, वो भी 4 साल के ब्लॉक में दो बार, छूट देता है। अगर डॉक्यूमेंट पूरे नहीं हैं तो स्लिप में दिखने के बावजूद ये अलाउंस पूरी तरह टैक्सेबल हो जाते हैं।

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2. टेक-होम सैलरी और टैक्सेबल इनकम एक नहीं होती

अधिकतर लोग मान लेते हैं कि जो रकम हाथ में मिलती है, वही उनकी टैक्सेबल इनकम है। लेकिन ऐसा नहीं है। टेक-होम में सिर्फ नेट सैलरी दिखती है, जबकि टैक्सेबल इनकम में कई छिपे हुए घटक भी शामिल होते हैं- जैसे एम्प्लॉयर का PF योगदान (7.5 लाख रुपए सालाना से ज्यादा हो तो टैक्स लगता है), पर्क्विजिट (Perquisite- कर्मचारी को मिलने वाले वेतन के अतिरिक्त लाभ) जैसे कंपनी कार, रेंट-फ्री हाउसिंग, फ्री मील्स, या बोनस जो अभी मिला नहीं लेकिन देय है। यही वजह है कि अक्सर आपकी सैलरी स्लिप के नंबर और फॉर्म 16/आईटीर (Form 16/ITR) के नंबर अलग होते हैं।
3. 80C और बाकी टैक्स डिडक्शन स्लिप पर नहीं दिखते

सैलरी स्लिप में EPF, TDS या प्रोफेशनल टैक्स जैसे अनिवार्य कटौती तो दिखती हैं, लेकिन यह नहीं बताती कि आप कौन-कौन से टैक्स-सेविंग निवेश क्लेम कर सकते हैं। PPF, ELSS, लाइफ इंश्योरेंस, बच्चों की ट्यूशन फीस, हेल्थ इंश्योरेंस (80D), होम लोन का ब्याज (24B), डोनेशन (80G), ये सब आपके टैक्स को कम करते हैं, लेकिन अगर आपने समय पर HR को डॉक्यूमेंट नहीं दिए तो ये स्लिप पर नजर नहीं आते।
4. टीडीएस अंतिम टैक्स नहीं होता (TDS is Not Final Tax)

आपकी स्लिप में कटा हुआ TDS (Tax Deducted at Source) सिर्फ एक अस्थायी टैक्स है। असली टैक्स लायबिलिटी आपकी ITR फाइलिंग के समय तय होती है, जब सभी इनकम सोर्स, छूट और डिडक्शन जोड़े जाते हैं। ऐसे में टैक्स ज्यादा भी निकल सकता है या रिफंड भी मिल सकता है।
5. पुरानी-नई टैक्स व्यवस्था स्लिप में साफ नहीं दिखती (Changing Regimes Can Change Your Tax Picture)

आपकी सैलरी स्लिप यह नहीं बताती कि आप पुरानी व्यवस्था (जिसमें छूट और डिडक्शन मिलते हैं) या नई व्यवस्था (कम टैक्स रेट, लेकिन छूट कम) के हिसाब से टैक्स दे रहे हैं। साल की शुरुआत में लिया गया यही फैसला आपके टेक-होम और टोटल टैक्स को काफी प्रभावित करता है। कई लोग तुलना किए बिना ऑप्शन चुन लेते हैं और ज्यादा टैक्स दे बैठते हैं।

आपकी सैलरी स्लिप सिर्फ सतह दिखाती है कि आपने क्या कमाया और सैलरी से क्या-क्या और कितना-कितना पैसा कटा, लेकिन यह नहीं बताती कि ये आंकड़े आपकी टैक्स प्लानिंग को कैसे प्रभावित करते हैं। इन छिपी बातों को समझकर आप अपनी सैलरी स्ट्रक्चर को बेहतर बना सकते हैं और टैक्स में बड़ी बचत कर सकते हैं।

लेखक- गौरव जैन, डायरेक्ट टैक्स, फ़ोर्विस मज़ार्स इन इंडिया
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