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हिमाचल हाई कोर्ट: स्कूल कैडर के 1404 लेक्चर के छीने सेवा लाभों को तुरंत बहाल करे राज्य सरकार, समान लाभ देने का आदेश

LHC0088 2025-11-19 23:37:16 views 702
  

हिमाचल हाई कोर्ट ने स्कूल लेक्चरर के पक्ष में निर्णय दिया है। प्रतीकात्मक फोटो  



विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह स्कूल कैडर के 1404 लेक्चररों के छीने गए सेवा लाभों को तुरंत बहाल करे। यह सेवा लाभ उन्हें अदालत के निर्णयों के आधार पर दिए गए थे। लाभार्थी शिक्षकों को वर्ष 2009 में अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया था, लेकिन अदालत के आदेश के आधार पर उनकी सेवाओं को नियुक्ति की प्रारंभिक तिथि से नियमित माना गया था।

शिक्षा विभाग ने ये लाभ पहले से ही इन शिक्षकों को दिए थे, लेकिन एक्ट की आड़ में कार्यालय आदेश 17 मार्च 2025 के तहत वापस ले लिए गए थे। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
शिक्षकों को समान लाभ देने का आदेश

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने शिक्षा विभाग को 31 दिसंबर, 2025 को या उससे पहले याचिकाकर्ताओं और अन्य समान स्थिति वाले अध्यापकों को समान लाभ देने के आदेश भी दिए। याचिकाकर्ताओं ने बताया था कि वे विवादित कार्यालय आदेश 17 मार्च 2025 से व्यथित थे, जिसके तहत, हिमाचल प्रदेश भर्ती और सरकारी कर्मचारियों की शर्तें अधिनियम, 2024 के अधिनियमन के बाद, प्रतिवादी शिक्षा विभाग द्वारा उन्हें दिए गए सेवा लाभ वापस ले लिए थे।

परिणामस्वरूप, याचिकाकर्ताओं के पहले से विस्तारित सेवा लाभ वापस ले लिए गए, जबकि समान स्थिति वाले अन्य व्यक्तियों के समान लाभों के दावे को कार्यालय आदेश 17.3.2025 के आधार पर अलग-अलग आदेश पारित करके खारिज कर दिया गया।
2008 में दी थी 1404 पदों को भरने की स्वीकृति

मामले के अनुसार, प्रमुख सचिव शिक्षा ने 11 जुलाई 2008 और 23 सितंबर 2008 को विभिन्न विषयों में व्याख्याता (स्कूल संवर्ग) के 1404 पदों को भरने की स्वीकृति प्रदान की। ये पद हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड हमीरपुर द्वारा दिनांक 28 अगस्त 2008 और दिनांक 17 फरवरी 2009 को अनुबंध के आधार पर भरे जाने के लिए विज्ञापित किए गए थे, जबकि व्याख्याता (स्कूल संवर्ग) के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में अनुबंध नियुक्ति का प्रावधान 25.06.2009 को अधिसूचित किया गया था।  
निर्णय का लाभ कुछ शिक्षकों को ही दिया

व्यथित होकर, याचिकाकर्ताओं ने अदालत में मामले दायर किए और न्यायालय ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओ को उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से ही नियमित नियुक्त मानते हुए सभी सेवालाभ प्रदान करें। न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में इस निर्णय का लाभ कुछ शिक्षकों को दिया गया। हालांकि, हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और सेवा की शर्तें अधिनियम, 2024 के लागू होने के बाद, याचिकाकर्ताओं के दावे को दिनांक 17.03.2025 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया।  
याचिका पर निर्णय को अक्षरश: लागू करने का आदेश

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अनुपालना याचिकाएं दायर की और न्यायालय ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे निर्णय को अक्षरशः लागू करें, क्योंकि यह अंतिम हो गया है। शिक्षा विभाग द्वारा इस मामले को फिर से सरकार के समक्ष उठाया गया। शिक्षा विभाग को सूचित किया गया कि उपरोक्त निर्णय सेवा शर्त एक्ट के अंतर्गत नहीं आता है। यह कहा गया कि कुछ याचिकाकर्ताओं को दिनांक 18.08.2025 के आदेश द्वारा अनुबंध पर कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से नियमित नियुक्ति की अनुमति दी गई थी। इन 1404 पदों पर भर्ती किए गए शेष व्याख्याताओं को भी नियमित नियुक्ति दी जानी है।  

यह भी पढ़ें: हिमाचल में बिजली उपभोक्ता मित्र भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता तय, सरकार की मंजूरी के बाद 1602 पद भरने की प्रक्रिया शुरू


सरकार द्वारा शिक्षा विभाग को बताया गया कि इन तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और हाईकोर्ट द्वारा पारित निर्णय के अनुपालन में, दिनांक 17-03-2025 का आदेश निष्प्रभावी हो गया है और याचिकाकर्ताओं और गैर-याचिकाकर्ताओं, को शुरू से ही नियमित कर्मचारी माना जाए। यह भी बताया गया कि उन्हें 10300-34800 4200 ग्रेड पे समय-समय पर स्वीकार्य भत्ते, उस तिथि से, जब वे कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर आरंभिक रूप से नियुक्त/कार्यभार ग्रहण किए थे, सभी परिणामी लाभों के साथ वेतनमान दिया जाएगा।  
याचिकाकर्ताओं को स्वीकार्य सेवा लाभ बहाल किए जाएं

संबंधित प्रधानाचार्य को माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार याचिका दायर करने की तिथि से केवल तीन वर्षों के लिए ही आर्थिक लाभ जारी करने का निर्देश दिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि  कि 10 सितंबर, 2025 के उपरोक्त कार्यालय आदेशों के मद्देनजर, 17.3.2025 के कार्यालय आदेश के कारण उत्पन्न उनकी शिकायतों का निवारण हो गया है और इसलिए, इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए कुछ भी शेष नहीं है, सिवाय इसके कि प्रतिवादियों को समयबद्ध तरीके से याचिकाकर्ताओं को स्वीकार्य सेवा लाभ बहाल करने के निर्देश जारी किए जाएं।
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