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एसपीएसई ने तकनीकी स्वीकृति के बिना ही करा डाले 2058 करोड़ के कार्य, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

cy520520 2026-2-21 08:56:44 views 863
  



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (एसपीएसई) ने तकनीकी स्वीकृति के बिना ही 2,058.35 करोड़ रुपये के काम करवा डाले हैं।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में यह राजफाश किया गया है। वर्ष 2022-23 की रिपोर्ट को शुक्रवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 113 में से 27 एसपीएसई 32,393.08 करोड़ रुपये के घाटे में थे, जबकि 39 ने 2,169.50 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया।

रिपोर्ट के अऩुसार तकनीकी स्वीकृति के बिना कराए जाने वाले 2,058.35 करोड़ रुपये के कार्यों में करीब 200.09 करोड़ रुपये से प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय प्रयागराज, करीब 341.57 करोड़ रुपये से विधान भवन का विस्तार, 236.26 करोड़ रुपये से राजकीय मेडिकल कालेज अंबेडकर नगर, 216.77 करोड़ रुपये से सोबन सिंह जीना राजकीय मेडिकल कालेज, अल्मोडा, 160.11 करोड़ रुपये से जिला कारागार प्रयागराज, 183.91 करोड़ रुपये से नवीन जिला कारागार, इटावा व 189.16 करोड़ रुपये से महाराजा सुहेलदेव राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बहराइच सहित 34 निर्माण कार्य शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2023 में 86 सरकारी कंपनी, 21 सरकार द्वारा नियंत्रित अन्य कंपनियां व छह सांविधिक निगम थे। 72 एसपीएसई संचालित जबकि 41 निष्क्रिय थे। घाटे में चल रहे शीर्ष पांच एसपीएसई में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड को 14,572.24 करोड़ रुपये, पूर्वांचल डिस्काम को 6,610.27 करोड़ रुपये, दक्षिणांचल डिस्काम को 5,073.77 करोड़, मध्यांचल डिस्काम को 4,819.92 करोड़ व पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन को 556.26 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।

पश्चिमांचल डिस्काम ने 991.67 करोड़ रुपये, जल विद्युत वितरण निगम ने 275.88 करोड़ रुपये, राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने 235.66 करोड़, उप्र राज्य भंडारण निगम ने 165.53 करोड़ व आवास एवं विकास परिषद ने 144.68 करोड़ रुपये का लाभ कमाया है।
इन कंपनियों ने नहीं की महिला निदेशकों की नियुक्ति

कंपनी अधिनियम के तहत उन्हें निदेशक मंडल में न्यूनतम एक महिला निदेशक की नियुक्ति करनी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार 15 कंपनियों (जल विद्युत निगम, जवाहरपुर विद्युत उत्पादन निगम, अऩुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, चीनी एवं गन्ना विकास निगम, मुरादाबाद स्मार्ट सिटी, लखनऊ स्मार्ट सिटी, स्टेट एग्रो इंडस्ट्रियल कारपोरेशन, सेतु निगम, स्माल इंडस्ट्रीज कारपोरेशन, यूपी डेस्को) ने एक भी महिला निदेशक नहीं बनाया। पावर ट्रांसमिशन, पावर कारपोरेशन, दक्षिणांचल डिस्काम, दी प्रदेशीय इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन आफ यूपी व प्रयागराज स्मार्ट सिटी ने महिला निदेशक की नियुक्ति तय समय के लिए नहीं की।
निर्माण निगम ने नहीं लागू की सीएसआर नीति

रिपोर्ट के अनुसार राजकीय निर्माण निगम और यूपी मेडिकल सप्लाईज कारपोरेशन ने सीएसआर नीति ही लागू नहीं की। यूपी डेवलपमेंट सिस्टम्स कारपोरेशन, यूपी मेडिकल सप्लाईज, निर्माण निगम, सेतु निगम, यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन, जवाहरपुर विद्युत उत्पादन निगम ने सीएसआर फंड होने पर भी खर्च नहीं किया।
सीएजी की रिपोर्ट के अन्य प्रमुख बिंदु

  • 35 एसपीएसई ने निदेशक बोर्ड की बैठकें ही आयोजित नहीं की।
  • सरकारी निधियों पर अर्जित 641.45 करोड़ रुपये के ब्याज को राजकोष में जमा नहीं किया गया।
  • 1047.67 करोड़ रुपये के औजार, मशीनरी, संयंत्र की खरीद व श्रमिकों की नियुक्ति नियमों के विपरीत की गई।
  • सैनिक स्कूल, अमेठी, राजकीय एलोपैथिक कालेज बहराइच, मेडिकल कालेज अल्मोड़ा, राम मनोहर लोहिया आर्युविज्ञान संस्थान लखनऊ सहित कई कार्यालयों के लिए 1.54 करोड़ रुपये के फर्नीचर व अन्य सामग्री जेम पोर्टल के माध्यम से नहीं खरीदी गई।
  • ग्रेटर नोएडा में स्मार्ट सिटी के सूचना संचार पर खर्च को लेकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ठेका दिया गया। दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर ठेका निरस्त हो गया लेकिन दो करोड़ की धरोहर राशि नहीं जब्त की गई।
  • राज्य सड़क परिवहन निगम ने निविदा सूचना प्रकाशित किए बिना कम दरों पर अऩुबंध किया, जिससे 2.15 करोड़ का घाटा हुआ।
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