राज्य ब्यूरो, पटना। विधायकों की अनुशंसा पर उनके क्षेत्र में विद्यालयों के भवनों का निर्माण हो इस मसले पर शुक्रवार को एक साथ 50 विधायकों ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण दिया। विधायकों द्वारा इतनी बड़ी संख्या में पहली बार ध्यानाकर्षण लाया गया था।
इस मसले पर सरकार की ओर जवाब देते हुए मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि विद्यालयों में भवन निर्माण का निर्णय संबंधित जिले के डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा लिया जाता है। वहीं जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिया जाएगा कि विधायकों द्वारा निर्माण कार्य के संबंध में जो अनुशंसा की जाएगी उसे प्राथमिकता दिया जाए। विधायक, विधान पार्षद व सांसद अपने स्तर से पांच-पांच अनुशंसा कर सकते हैं।
एक साथ 50 विधायकों द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण में कहा गया कि राज्य के जर्जर विद्यालयों का भवन निर्माण, अतिरिक्त कमरे का निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए शिक्षा विभाग द्वारा जिलों में अच्छी-खासी राशि दी जा रही है। लेकिन प्रधानाध्यापक एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी की मिलीभगत से मनमाने ढंग से कार्य कराया जा रहा। जहां जर्जर विद्यालय के नवनिर्माण की जरूरत है वहां पर राशि नहीं खर्च की जाती है।
इसलिए शिक्षा विभाग द्वारा स्वीकृत राशि से विधायकों की अनुशंसा पर काम कराया जाए।एक विधायक ने कहा कि विधानसभा की कमेटी से निर्माण कार्य की जांच करायी जाए। नीतीश मिश्रा ने कहा कि विद्यालय की क्या प्राथमिकता है इस बारे में विधायकों जानकारी तक नहीं होती।
विधायक सुनील कुमार ने कहा कि निर्माण कार्य में विधायकों की अनुशंसा को नहीं माना जाता है। मंत्री श्रवण कुमार ने सभी काम निविदा के माध्यम से शैक्षिक आधारभूत संरचना के माध्यम से होता है। अब तक 1346 अनुशंसित विद्यालयों में काम हो चुका है, केवल 44 में काम शेष है। |