साउथ बाइपास रेलवे पुल के समीप प्लास्टिक के पाइप में लगी आग के बाद उठता हुआ धुआं
जागरण संवाददाता, हिसार। गांव सातरोड में शुक्रवार सायं को रेलवे बिजली घर के समीप रखे प्लास्टिक के बने पाइपों से आग की लपटें उठने लगी। समय था शाम करीब साढ़े चार बजे। देखते-ही-देखते आग ने ऐसा उग्र रूप धारण किया कि उससे उठता स्याह धुआं लगभग 17 किलोमीटर दूर आर्य नगर तक आकाश में फैलता दिखाई देने लगा। इस भीषण हादसे के बीच राहत की बात यह रही कि आग से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग हरकत में आया और विभिन्न केंद्रों से दमकल गाड़ियां घटनास्थल की ओर दौड़ी। करीब एक से दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। आग की तीव्रता को देखते हुए पानी के साथ-साथ फोम का भी सहारा लिया गया, जिसमें लगभग 15 फोम के केन प्रयोग किए गए। समय रहते आग पर नियंत्रण पा लेने से रेलवे के इस महत्वपूर्ण बिजलीघर को क्षति से बचा लिया गया।
आग की आपात स्थिति को देखते हुए रेलवे कर्मियों ने एहतियातन करीब आधे घंटे तक बिजली आपूर्ति बंद रखी। इसका असर यह हुआ कि कुछ समय के लिए कई मालगाड़ियां और यात्री ट्रेनें प्रभावित हुई। वहीं आग की सूचना मिलते ही नगर निगम, अमृत प्रोजेक्ट के तहत ठेकेदार के कारिंदे, बीएंडआर और एचएसवीपी के अधिकारी आग की जानकारी लेने में जुटे रहे।
यह घटना कोई पहली नहीं थी। सिरसा रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड कालोनी में लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व भी इसी प्रकार प्लास्टिक पाइपों में आग लग चुकी है। तब भी पाइप कार्य के लिए रखे थे और आग पर काबू पाने में लंबा समय लगा था, जिससे भारी नुकसान हुआ था।
पांच-छह पाइप जलकर राख
दमकलकर्मी प्रदीप के अनुसार शाम करीब पांच बजे एक राहगीर ने आग की सूचना दी। इसके बाद आजाद नगर दमकल केंद्र से दो गाड़ियां, जिंदल कंपनी से एक, जीजेयू के सामने स्थित मुख्य दमकल केंद्र से तथा मार्केट कमेटी से कुल मिलाकर छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। सबसे पहले रेलवे बिजलीघर की ओर से आग बुझाने का प्रयास किया गया। इस दौरान करीब पांच-छह पाइप जलकर राख हो चुके थे।
चूक से हो सकता था बड़ा हादसा
दमकल विभाग के अनुसार, आग पर नियंत्रण पाने में छह गाड़ियों का पानी लगा।, कुछ गाड़ियों ने एक से अधिक चक्कर भी लगाए। इस आगजनी में करीब 90 हजार लीटर पानी बहाया। मौके पर मौजूद रेलवे टेक्नीशियन संदीप कुमार ने बताया कि आग लगते ही बिजली आपूर्ति रोक दी गई थी, क्योंकि जरा-सी चूक बड़े हादसे को जन्म दे सकती थी।
यह बिजलीघर 132 केवी क्षमता का है, जिससे लगभग 50 किलोमीटर क्षेत्र तक रेलवे को बिजली आपूर्ति होती है। वर्ष 2016 में निर्मित यह बिजलीघर पूरी तरह सुरक्षित रहा और आग का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
शॉर्ट-सर्किट बताया जा रहा कारण
प्रारंभिक तौर पर आग लगने का कारण शार्ट सर्किट माना जा रहा है। दमकल कर्मियों के अनुसार ये एसटीपी की पाइपें थीं, जो लंबे समय से वहीं पड़ी थी। ऊपर से गुजरती बिजली की तारों में शार्ट-सर्किट होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही दमकल कर्मियों ने विभाग में स्टाफ की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया। जहां एक गाड़ी में छह कर्मियों की आवश्यकता होती है, वहां फिलहाल तीन-तीन कर्मचारियों के सहारे ही काम चलाया जा रहा है।
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