प्लॉट पर कब्जा नहीं मिलने पर हाईकोर्ट सख्त। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फरीदाबाद के सेक्टर-80 स्थित प्लॉट आवंटन विवाद में दर्जनों आवंटियों को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अदालत ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के मुख्य प्रशासक, फरीदाबाद के एस्टेट ऑफिसर तथा अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश जस्टिस अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने श्वेता मेहता व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पारित किया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील आदिल सिंह बोपाराय ने अदालत को बताया कि सेक्टर-80 में ई-नीलामी के माध्यम से प्लॉट आवंटित किए गए थे। आवंटियों ने पूरी बिक्री राशि जमा कर दी, लेकिन आज तक वास्तविक भौतिक कब्जा नहीं सौंपा गया। एक मामले में प्लॉट नंबर-79 के आवंटी ने मार्च 2023 की ई-नीलामी में सफल बोली लगाकर 87.39 लाख रुपये का संपूर्ण भुगतान किया था।
19 अक्टूबर 2023 को आवंटन पत्र भी जारी हो गया, परंतु \“साइट पर विकास कार्य न होने\“ का हवाला देकर कब्जा आवेदन खारिज कर दिया गया। आवंटियों का कहना है कि उन्होंने बैंक से लाखों रुपये का ऋण लेकर प्लाट खरीदा है और नियमित रूप से किस्तें चुका रहे हैं।
इसके बावजूद कब्जा न मिलना न केवल आर्थिक संकट पैदा कर रहा है, बल्कि उनके कानूनी अधिकारों का भी उल्लंघन है।याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी बताया कि एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक ने 1 अक्टूबर 2025 को संबंधित अधिकारियों को विकास कार्य पूरा कर कब्जा सौंपने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं और अधिग्रहण प्रक्रिया न्यायिक रूप से अंतिम हो चुकी है। ऐसे में कब्जा रोकने का कोई वैधानिक आधार शेष नहीं है।याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि 25 दिसंबर 2025 को भूमि अधिग्रहण को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान राज्य के एक मंत्री द्वारा प्लाट आवंटन रद्द कर धन वापसी का आश्वासन दिया गया था।
इससे वैध आवंटन निरस्त किए जाने की आशंका उत्पन्न हो गई है।सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष ने स्वीकार किया कि कुछ प्लाट एक अन्य लंबित याचिका से जुड़े हैं, जिसकी सुनवाई मार्च 2026 में प्रस्तावित है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अगली तिथि तक किसी भी याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई प्रतिकूल कदम नहीं उठाया जाएगा।
कोर्ट ने एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक, फरीदाबाद के एस्टेट आफिसर व याचिका में शामिल राज्य के दोनो प्रतिवादी मंत्रियों को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया है। |
|