धर्म डेक्स, नई दिल्ली। होली से ठीक आठ दिन पहले के समय को \“होलाष्टक\“ कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन आठ दिनों में नौ ग्रह उग्र हो जाते हैं, जिसके कारण शुभ कामों पर रोक लग जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि होलाष्टक का यह समय पूजा-पाठ के लिए बहुत फलदायी माना जाता है? पौराणिक कथाओं के अनुसार, होलाष्टक (Holashtak 2026) वही दिन हैं, जब भक्त प्रहलाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने बहुत यातनाएं दी थीं।
अंत में भगवान नरसिंह ने प्रकट होकर प्रहलाद की रक्षा की और सभी बुराइयों का अंत किया। इसीलिए, होलाष्टक के दौरान भगवान नरसिंह की पूजा और उनके 108 नामों का जाप करना संकटों से मुक्ति पाने का सबसे अचूक उपाय है, जो इस प्रकार हैं -
यह भी पढ़ें- Holashtak 2026: 23 या 24 फरवरी, कब शुरू होगा होलाष्टक? इन बातों का रखें ध्यान
यह भी पढ़ें- प्रह्लाद की भक्ति के आगे क्यों बेअसर हुई हिरण्यकश्यप की शक्ति? जानें होलाष्टक का धार्मिक रहस्य?
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।