रवीन्द्रालय में हैंडलूम, सिल्क एवं खादी एक्सपो में सम्मानित हुए बुनकरों के साथ खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग मंत्री राकेश सचान व स्टाम्प पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल
राज्य ब्यूरो, जागरण लखनऊ। पारंपरिक उद्योगों को सशक्त बनाकर बुनकरों और दस्तकारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में राजधानी के रवींद्रालय मोतीलाल नेहरू मार्ग पर उत्तर प्रदेश हैंडलूम, सिल्क एवं खादी एक्सपो का शुभारंभ किया गया।
यह एक्सपो दो मार्च तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा। गुरुवार को प्रदेश के उत्कृष्ट उत्पादों का प्रदर्शन फैशन शो के माध्यम से किया जाएगा।
एक्सपो में उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के खादी, सिल्क और हैंडलूम उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की व्यवस्था की गई है। प्रदेश के अलग-अलग जनपदों से आए बुनकरों और दस्तकारों ने अपने उत्पादों के 60 से अधिक स्टाल लगाए हैं। यहां पारंपरिक साड़ियां, दुपट्टे, कुर्ते, हैंडलूम कपड़े और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
कार्यक्रम के दौरान संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए चयनित बुनकरों को सम्मानित किया गया। प्रदेश के 13 परिक्षेत्रों से प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले कुल 39 उत्कृष्ट बुनकरों को डिमांड ड्राफ्ट, शील्ड, अंगवस्त्र और प्रमाणपत्र दिए गए। खादी, ग्रामोद्योग एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि वस्त्र उद्योग कृषि के बाद देश में सर्वाधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है।
प्रदेश में लगभग 1.91 लाख बुनकर और दस्तकार इस परंपरा से अपनी आजीविका चला रहे हैं और उनकी कलाकृतियां देश-विदेश में पहचान बना रही हैं। हैंडलूम बुनकरों को बिजली बिल में प्रतिमाह प्रतिपूर्ति दी जा रही है। टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग पालिसी-2022 के तहत निवेशकों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
वहीं पीएम मित्र योजना के अंतर्गत मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। हरदोई और लखनऊ में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिससे प्रदेश को वस्त्र उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
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