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जब होली में रंग नहीं, लड्डू उड़ते हैं, इस अनोखी परंपरा की शुरुआत कैसे हुई?

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लड्डू मार होली का धार्मिक महत्व (Image Source: AI-Generated)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। होली के पर्व आने का हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस अवसर पर ब्रज समेत देशभर में बेहद खास रौनक देखने को मिलती है। इस पर्व की शुरुआत मथुरा और वृन्दावन में बसंत पंचमी से होती है। होली से पहले बरसाना और नंदगांव में लड्डू मार और लठमार होली का उत्सव मनाया जाता है।
बरसाना में लड्डू मार होली के दौरान भक्तों पर लड्डुओं की वर्षा की जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर कैसे हुई लड्डू मार (Laddu Mar Holi 2026 History) की शुरुआत। अगर नहीं पता, तो आइए जानते हैं इसकी खास वजह के बारे में।

  

(Image Source: AI-Generated)
इस तरह शुरू हुई लड्डू मार होली

पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में श्रीराधा रानी के पिता वृषभानु जी ने कृष्ण जी के गांव नंदगांव में होली खेलने का निमंत्रण भेजा। उनके निमंत्रण को भगवान श्रीकृष्ण ने स्वीकार किया। इसके बाद उन्होंने एक पंडा को बरसाना भेजा। जब बात का पता चला कि बरसाना भवान श्रीकृष्ण होली खेलने आएंगे, तो गोपियां खुशी से झूम उठीं और उन्होंने अत्यधिक खुशी में पंडा जी पर लड्डू फेंकना शुरू कर दिया और पंडा ने भी गोपियों पर लड्डू फेकें। ऐसा माना जाता है कि तभी से लड्डू मार होली की शुरुआत हुई।
बरसाना में कब है लड्डू मार होली? (Laddu Mar Holi 2026 Date)

इस बार बरसाना के श्रीराधा रानी के मंदिर में 25 फरवरी को लड्डू मार उत्सव मनाया जाएगा और इसके अगले दिन यानी 26 फरवरी को लठ्मार होली मनाई जाएगी। इस दिन ब्रज में बेहद खास रौनक देखने को मिलती है।
बेहद प्रसिद्ध है लठ्ठमार होली

लड्डू मार होली की तरह लठ्ठमार होली भी बेहद प्रसिद्ध है। इस उत्सव में शामिल होने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। लठ्ठमार होली के दौरान ब्रज की गोपियां ग्वालों पर लाठियां बरसाती हैं और ग्वाल बाल अपना बचाव के लिए लकड़ी की मजबूत ढाल का इस्तेमाल करते हैं और गोपियों पर गुलाल उड़ाकर प्रेम जताते हैं। इस उत्सव में के दौरान ब्रज की गलियों में होली के गीतों की मधुर आवाज सुनाई देती है।
ब्रज होली 2026 का शेड्यूल

  • 25 फरवरी -बरसाना में लड्डू मार होली
  • 26 फरवरी- बरसाना में लट्ठमार होली
  • 27 फरवरी- नदगांव में लठ्ठमार होली
  • 28 फरवरी- वृन्दावन में फूलों की होली  
  • 01 मार्च- गोकुल में छड़ी मार होली
  • 02 मार्च- गोकुल में होली उत्सव
  • 03 मार्च- होलिका दहन
  • 04 मार्च- होली




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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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