बरात लौटने के बाद किन्नर दूल्हे संग परिवारजन लापता।
संवाद सूत्र, बाराबंकी। सारी रस्म पूरी हुई और सात फेरे लेकर दुल्हन विदा होने जा रही थी, तभी नेक लेने पहुंचे किन्नरों ने दुल्हे पर ऐसा शक जाहिर किया, दुल्हन ने विदा होने से इन्कार कर दिया। घंटों गहमागहमी के बाद आखिरकार वधु पक्ष ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस की मध्यस्तता के बाद उस समय मामला शांत हो गया, लेकिन अब 25 फरवरी को मामले में निर्णय होना है। बरात लौटने के बाद से दूल्हा समेत परिवारजन लोकलाज के भय से वह कहीं चले गए हैं। पुलिस परिवारजन की खोज कर रही है।
रामसनेहीघाट के एक गांव में जन्मा बच्चा अपनी मां और मौसी के परिवार में अकेला पुत्र था। मां के कलेजे के टुकड़े को मौसी ने गोद लिया, कोठी निवासी माैसी के यहां उसकी परवरिश होने लगी। धीरे-धीरे बच्चे की हरकतें लड़कियों की तरह दिखने लगीं। वह लड़कियों के कपड़े पहनता और बड़े बाल रखता। बचपना समझकर मां व मौसी दोनों नजर अंदाज करते रहे।
बताया जाता है कि दो साल पहले परिवारजन ने उसका पहनावा और बाल सब लड़कों जैसे करवाए और फिर एक व्यक्ति के माध्यम से कोठी में ही उसका विवाह तय कर दिया।
बताया यह भी जा रहा है कि लड़की पक्ष को भी किन्नर होने की आशंका थी, लेकिन रिश्ता किन परिस्थितियों में शादी तय हो गई, इसका पता नहीं चल सका। रीत रिवाज के साथ विवाह संपन्न हुआ और 15 फरवरी की सुबह दुल्हन की विदाई होने जा रही थी, तभी वहां पहुंचे किन्नरों ने जब दूल्हे को देखा तो उसे अपनी बिरादरी का किन्नर होना बता दिया।
यह सुनकर दुल्हन ने विदा होने से इन्कार कर दिया। फिर दोनों पक्षों में विवाद हाेने लगा। शाम तक बात नहीं बनी तो वधु पक्ष से पुलिस को सूचना दी। कोठी पुलिस ने जाकर मामला समझा और फिर वधु पक्ष को खर्च व जेवरात वापस कर मामले को रफादफा करने का समझौता करवा दिया।
इस घटना के बाद जिसको अब किन्नर कहा जा रहा है उसकी मां व मौसी दोनों परिवार लापता हैं। चर्चा है कि लोक लाज के भय से किन्नर सहित दोनों परिवार कहीं चले गए हैं।
कोठी थाना प्रभारी अमित सिंह भदौरिया ने बताया कि शिकायत पर मामला शांत कराया गया था अब 25 फरवरी को ग्राम प्रधान व सभ्रांत लोगों के बीच बैठकर दोनों पक्षों के लेनदेन कर मामले को खत्म करने की बात गई है।
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