2050 तक सड़क परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में 50 प्रतिशत तक की कमी संभव।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली और एनसीआर में वर्ष भर प्रदूषण के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) की एक नई वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक अगर भारत अपने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) लक्ष्यों को सही तरीके से लागू करता है तो 2050 तक सड़क परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में 50 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है। यह कमी भारत के 2070 तक \“नेट-जीरो\“ (कार्बन उत्सर्जन शून्य करने) के लक्ष्य को पाने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
दिल्ली और एनसीआर के लिए इसलिए अहम
दिल्ली और इसके आसपास के शहरों में वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। आइसीसीटी की \“\“विजन-2050\“\“ रिपोर्ट के अनुसार ईवी संक्रमण न केवल देश के लिए बल्कि विशेष रूप से दिल्ली और एनसीआर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता सुधारने का एक बड़ा अवसर है। अध्ययन में कहा गया है कि यदि वर्तमान नीतियों को पूरी ताकत से लागू किया जाए, तो जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर निर्भरता कम होगी, जिससे हवा साफ होगी।
80 प्रतिशत ईवी भारत में ही बन रहे
रिपोर्ट में भारत के ईवी बाजार को लेकर सकारात्मक रुझान सामने आए हैं। देश में बिकने वाले लगभग 80 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन भारत में ही निर्मित हो रहे हैं। यह स्थिति भारत को यूरोपीय संघ और जापान जैसे उन्नत बाजारों की श्रेणी में खड़ा करती है।
आइसीसीटी इंडिया के प्रबंध निदेशक अमित भट्ट ने कहा, “भारत का ईवी संक्रमण केवल जलवायु अवसर नहीं है, बल्कि एक बड़ा आर्थिक अवसर भी है। 80 प्रतिशत घरेलू विनिर्माण यह दर्शाता है कि हमारे पास स्वच्छ परिवहन भविष्य के लिए मजबूत नींव है।”
भारी वाहनों का विद्युतीकरण होगा अगला बड़ा कदम
रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन चुनिंदा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में है, जो भारी वाहनों (ट्रक-बस) के लिए भी शून्य-उत्सर्जन लक्ष्य बना रही हैं। माल ढुलाई के लिए ईवी का उपयोग भविष्य में प्रदूषण कम करने का एक बड़ा जरिया बनेगा।
2030 के बाद आएगी क्रांति
यद्यपि वर्तमान में ईवी की बिक्री हिस्सेदारी सीमित लग सकती है, लेकिन विश्लेषण बताते हैं कि 2030 के बाद नीतिगत फैसलों के प्रभावी होने से ईवी अपनाने की गति बहुत तेज हो जाएगी। दोपहिया, तिपहिया और यात्री वाहनों के साथ-साथ मालवाहक वाहनों में ईवी के बढ़ते चलन से परिवहन क्षेत्र के प्रदूषण में दुनिया की सबसे बड़ी कटौतियों में से एक देखने को मिल सकती है।
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