खिवनी में नजर आए तीन दुर्लभ प्रजातियों के गिद्ध।
डिजिटल डेस्क, इंदौर। हिमालय की ऊंची पर्वतमालाओं से हजार किलोमीटर से अधिक की उड़ान भरकर विशाल गिद्धों ने मध्यप्रदेश के देवास स्थित खिवनी वन्यजीव अभयारण्य में दस्तक दी है। यहां पहली बार हिमालयन ग्रिफॉन वल्चर के साथ दो गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियां—किंग (रेड-हेडेड) वल्चर और इंडियन वल्चर—एक साथ देखी गई हैं। विशेषज्ञ इसे न केवल प्रदेश, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अत्यंत महत्वपूर्ण घटना मान रहे हैं।
तीन दुर्लभ प्रजातियां एक साथ
वन्यजीव जानकारों के मुताबिक, हिमालयन ग्रिफॉन वल्चर सामान्यतः ऊंचे पर्वतीय इलाकों में पाया जाता है। सर्दियों में भोजन की तलाश में यह मैदानी क्षेत्रों की ओर रुख करता है, लेकिन मध्यभारत तक इसकी पहुंच बेहद कम दर्ज होती है। ऐसे में खिवनी में इसकी मौजूदगी खास मानी जा रही है।
इस बार यहां किंग वल्चर (रेड-हेडेड वल्चर) और इंडियन वल्चर भी देखे गए हैं। ये दोनों प्रजातियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “क्रिटिकली एंडेंजर्ड” श्रेणी में सूचीबद्ध हैं और इनकी आबादी बेहद सीमित रह गई है। तीनों प्रजातियों का एक साथ दिखना दुर्लभ संयोग माना जा रहा है।
वन विभाग का मानना है कि खिवनी का सुरक्षित पारिस्थितिक तंत्र और पर्याप्त भोजन उपलब्धता इन गिद्धों को यहां तक खींच लाई है। पिछले वर्ष से इजिप्शियन वल्चर ने भी इस अभयारण्य को अपना ठिकाना बना लिया है।
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अभयारण्य अधीक्षक विकास माहोरे ने बताया कि गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी होते हैं और पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। इतनी प्रजातियों की एक साथ उपस्थिति संरक्षण और ईको-टूरिज्म दोनों के लिहाज से सकारात्मक संकेत है।
बाघिन ‘रानी’ सिखा रही शिकार के गुर
दुर्लभ गिद्धों की मौजूदगी के बीच खिवनी में बाघों की सक्रियता भी चर्चा में है। अभयारण्य की चर्चित बाघिन ‘रानी’ हाल ही में ट्रैप कैमरे में अपने तीन शावकों के साथ नजर आई है। इस बार वह शावकों को शिकार करना सिखाती दिखी, जो जंगल में उनके जीवित रहने की पहली पाठशाला मानी जाती है। खिवनी में वर्तमान में करीब 10 बाघों की मौजूदगी बताई जा रही है।
जैव विविधता का सशक्त केंद्र
देवास और सीहोर जिले की सीमा में फैला खिवनी अभयारण्य लगभग 134 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है। यहां बाघ, तेंदुआ, भालू, जंगली कुत्ते, लकड़बग्घा, विभिन्न प्रजातियों के हिरण, सांप और 100 से अधिक पक्षी प्रजातियां निवास करती हैं।
हिमालय से आए विशाल गिद्धों की यह दुर्लभ मौजूदगी खिवनी को देश के प्रमुख वन्यजीव केंद्रों की सूची में और मजबूती से स्थापित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संरक्षण प्रयास इसी तरह जारी रहे, तो यह क्षेत्र गिद्ध संरक्षण का महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है। |