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विदेश में नौकरी के नाम पर भारतीयों को साइबर स्लेवरी में डालने वाले दो गिरफ्तार, लाओस में करवाते थे ठगी

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जागरण संवाददाता, बलरामपुर। विदेश में अच्छी नौकरी का झांसा देकर साइबर स्लेवरी (साइबर गुलामी) में डालने वाले सक्रिय गैंग का पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया है। तुलसीपुर पुलिस ने अंतरराज्यीय संगठित गिरोह के दो शातिर अरोपितों को गिरफ्तार किया है।

इनकी पहचान संतकबीरनगर के बखिरा स्थित अमहवा गांव निवासी फैजान रजा व महाराष्ट्र मुंबई के रूम नंबर 72 सी गली नवजीवन हाउसिंग सोसायटी सिंह स्टेट समतानगर कांदावली (मूल निवासी ग्राम कुसरना थाना व तहसील केराकत जनपद जौनपुर) के तौर पर हुई है।

पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि तुलसीपुर के नई बाजार कस्तूरबा गली निवासी शोएब अहमद को फैजान रजा ने यूट्यूब चैनल पर विज्ञापन के माध्यम से थाईलैंड में डाटा एंट्री आपरेटर की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 60 हजार रुपये और अभिलेख लिए।

अवैध रूप से लाओस ले गए

इसके बाद मुंबई से उसे थाईलैंड और वहां से अवैध रूप से लाओस ले गए। लाओस में राम प्रवेश सिंह ने उसे स्कैम कंपाउंड में दो लाख 50 हजार रुपये में बेच दिया, जहां उससे जबरन साइबर फ्राड एवं साइबर स्लेवरी कराई जाती थी। भारतीय दूतावास से संपर्क होने पर वहां से मुक्त होकर लौटे शोएब अहमद ने तुलसीपुर थाना में फैजान रजा और राम प्रवेश सिंह के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था।

प्रभारी निरीक्षक राजकुमार सिंह ने आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की। पुलिस टीम ने आरोपित फैजान रजा को हरैया तिराहा मालगोदाम रोड क्रासिंग के पास से गिरफ्तार किया। वहीं राम प्रवेश सिंह के बीते 11 फरवरी को उसके मुंबई स्थित पते से गिरफ्तार किया गया था।

झूठे विज्ञापन से युवकों को गुमराह कर पहुंचाते थे लाओस

पुलिस की पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि दोनों एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर मानव तस्करी गिरोह का हिस्सा थे, जो इंटनेट मीडिया, विशेषकर यूट्यूब चैनल @Faizuvlog350 के माध्यम से थाईलैंड (बैंकाक) में डाटा एंट्री नौकरी का झूठा विज्ञापन देकर भारतीय युवकों को 60 हजार रुपये वेतन का लालच देते थे।

उनसे धनराशि वसूल कर बैंकाक का टिकट बनवाते थे। वहां से गोल्डन ट्रायंगल मार्ग के जरिए अवैध रूप से लाओस पहुंचाकर स्कैम कंपाउंड में प्रति व्यक्ति लगभग 2.5 लाख रुपये में बेच देते थे। यहां पीड़ितों को बंधक बनाकर उनसे आनलाइन निवेश एवं चैटिंग के माध्यम से साइबर ठगी कराई जाती थी।

इस अपराध में रामप्रवेश लाओस में रिसीविंग एवं समन्वय की भूमिका निभाता था, जबकि फैजान भर्ती, इंटरव्यू और समन्वय का कार्य करता था। उनके दो सहयोगी मकसूद व शादाब थे। चारों आपस में कमीशन बांट लेते थे। इनमें से कुछ भुगतान क्रिप्टो (बाइनेंस आइडी) के माध्यम से ली जाती थी।

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गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक कर्मवीर सिंह, हेड कांस्टबेल अशोक कुमार गौड़, कांस्टेबल अनिल कुमार, अवधेश कुमार, अखिलेश कुमार, जयसिंह यादव व शुभम सिंह शामिल रहे।
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