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एलिन शेरिन अब्राहम । (फोटो-एक्स)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नियति का क्रूर खेल देखिए जिस उम्र में नन्हे कदम चलना सीखते हैं, उसी उम्र में 10 महीने की एलिन शेरिन अब्राहम जीवन की जंग हार गई। लेकिन यह कहानी अंत की नहीं, उस साहस की है जिसने एक परिवार के असहनीय दु:ख को मानवता के महादान में बदल दिया।
पांच फरवरी को पथानामथिट्टा जिले में एक भीषण सड़क हादसे में एलिन गंभीर रूप से घायल हो गई। कई प्रयासों के बाद 13 फरवरी को कोच्चि के अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। उस पल परिवार का संसार थम गया, पर माता-पिता अरुण अब्राहम और शेरिन एन जान ने अपनी बेटी के अंगदान का निर्णय लेकर अंधेरे में उम्मीद जगा दी। इस फैसले के साथ एलिन केरल की अब तक की सबसे कम उम्र की अंगदाता बन गई।
एलिन का लिवर एक छह महीने के शिशु को नया जीवन देगा। उसकी दोनों किडनियां तिरुअनंतपुरम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती एक बच्चे के काम आएंगी। उसका हार्ट वॉल्व श्री चित्रा तिरुनल आयुर्विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान भेजा गया है और आंखें भी दान की गई हैं।
राजकीय सम्मान दिया जाएगा
अब इस मार्मिक घटना में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। पीटीआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने \“एक्स\“ पर पोस्ट कर एलिन को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने का निर्णय लिया है। वहीं, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने भी माता-पिता के निर्णय को मानवता की अद्वितीय मिसाल बताया।
विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने इसे समस्त मानवता के लिए संदेश कहा। स्वास्थ्य मंत्री वीणा जार्ज ने भी इस निर्णय को मानवता का अनुपम मिसाल बताया। सच तो यह है कि एलिन भले इस दुनिया में नहीं रही, लेकिन उसकी धड़कनें अब कई घरों में उम्मीद बनकर जीवित हैं। एक नन्हीं जिंदगी ने विदा लेते-लेते सिखा दिया कि प्रेम और त्याग ही मानवता की सबसे बड़ी पहचान हैं।
(समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ) |
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