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यूपी बोर्ड परीक्षा में हर उत्तर पुस्तिकाओं पर लगेगी केंद्र व्यवस्थापक की मुहर, 8033 केंद्रों पर सख्त निगरानी

Chikheang 9 hour(s) ago views 544
  



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। यूपी बोर्ड की 18 फरवरी से शुरू हो रही परीक्षा को लेकर इस बार कड़े इंतजाम किए गए हैं। उत्तर पुस्तिकाओं पर केंद्र व्यवस्थापक की मुहर अनिवार्य होगी ताकि कापियों को बाहर ले जाकर लिखने जैसी शिकायतों पर पूरी तरह रोक लग सके। पूरे प्रदेश में 222 अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर विशेष निगरानी रहेगी, जबकि 20 केंद्रों पर जैमर लगाए जाएंगे।

शुक्रवार को बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, डीडीआर और जिला विद्यालय निरीक्षकों के साथ वर्चुअल बैठक कर परीक्षा को लेकर आवश्यक निर्देश दिए।  

हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में इस बार 53,37,778 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। परीक्षा 8033 केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। गलत प्रश्नपत्र किसी भी स्थिति में न खुले, इसके लिए भी सख्त निगरानी रहेगी।  

प्रदेश में 222 अतिसंवेदनशील केंद्र चिन्हित किए गए हैं, जहां विशेष सतर्कता बरती जाएगी। जिन 20 केंद्रों पर जैमर लगाए जाएंगे, इसकी जानकारी परीक्षा से दो दिन पहले दी जाएगी। इंटरनेट मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।

मेरठ, बिजनौर, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत, श्रावस्ती, इटावा, बांदा, जौनपुर, गाजीपुर, उन्नाव, प्रतापगढ़, बाराबंकी, ललितपुर, सोनभद्र, गौतमबुद्धनगर, बागपत, चित्रकूट और संभल में अभी तक कक्ष निरीक्षकों की तैनाती नहीं हुई थी। शनिवार तक तैनाती के निर्देश दिए गए।

हापुड़ के जिला विद्यालय निरीक्षक ने एसआइआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) ड्यूटी के कारण सेक्टर मजिस्ट्रेट की अनुपलब्धता बताई। इस पर निर्देश दिए गए कि परीक्षा में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं होगी।

प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए रात में स्ट्रांग रूम का औचक निरीक्षण करने के लिए टीम गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने तैयारियों पर प्रस्तुतीकरण दिया। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव भी वर्चुअल बैठक में शामिल रहे।

राजकीय और एडेड विद्यालयों से क्यों नहीं निकलते टॉपर्स

बैठक में हाईकोर्ट के आदेशों को लेकर चर्चा हुई। एसीएस ने कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक कोर्ट के मामलों में सतर्क रहें। जिसकी मांग उचित हो, उसका समय से निस्तारण करें ताकि अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचा जा सके।

उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षकों से कहा कि वे कानूनी मामलों में उलझने के बजाय विद्यालयों के निरीक्षण और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर अधिक ध्यान दें। बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि हर वर्ष असहायता प्राप्त विद्यालयों से टॉपर निकलते हैं, जबकि राजकीय और सहायता प्राप्त इंटर कालेजों में बेहतर सुविधाएं होने के बावजूद परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहते। शिक्षकों को प्रेरित कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर जोर दिया गया।
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