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साहब, कहीं फिर खून न बह जाए...यूपी के इस गांव में बारात आने से पहले ही पुलिस तैनात, चर्चा में है दादी की ये गुहार

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बिलासपुर कोतवाली में प्रार्थना पत्र लेकर पहुंची मुन्नी देवी। जागरण



संवाद सहयोगी, बिलासपुर। आमतौर पर शादियों के कार्ड पर हर्षोल्लास के साथ आगमन का निमंत्रण होता है। लेकिन, क्षेत्र के एक घर में इस वक्त शादी की खुशियों से ज्यादा डर और आशंकाओं का पहरा है। यहां शहनाइयों की गूंज से ज्यादा फिक्र इस बात की है कि बरात बिना किसी अनहोनी के दरवाजे तक पहुंच जाए। यह कहानी गांव मुल्लाखेड़ा निवासी एक ऐसे स्वजन की है जिन्होंने पुलिस प्रशासन से बैंड-बाजे के शोर के बीच खाकी की मौजूदगी और सुरक्षा की मांग की है।

स्वजन की एक ही गुहार है साहब सुरक्षा दीजिए, कहीं इस बार भी बरात में झगड़ा न हो जाए। गांव निवासी मुन्नी देवी अपने पति मानकचंद के साथ कोतवाली पहुंच गईं और पुलिस को एक प्रार्थना पत्र सौंपा। इस दौरान उन्होंने प्रभारी निरीक्षक जीत सिंह को बताया कि उनका यह डर बेवजह नहीं है। छह माह पुराने वो गहरे जख्म हैं जो आज भी हरे हैं।

बीते 12 नवंबर को जब इसी आंगन में खुशियां चहक रही थीं, तब डीजे पर डांस को लेकर विवाद हो गया था। उनकी पोती की बरात में एक मामूली विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया था और देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई थी। बरात में चले लाठी डंडो के दौरान तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती करवाया था।

वही मंजर, वही डर आज फिर दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। अब 15 फरवरी को उनकी दूसरी पोती अमृता की बरात आनी है। परिवार को अंदेशा है कि पुरानी दुश्मनी की आग में उनकी बेटी की डोली और खुशियों को झुलसाने की कोशिश फिर से हो सकती है। आरोप लगाया कि किसी व्यक्ति ने फोन करके दूल्हा के परिवार को धमकाया भी है।

अब उन्हें डर है कि कहीं दोबारा उसी तरह की घटना को अंजाम न दिया जाए। इस पर प्रभारी निरीक्षक ने उन्हें आश्वस्त किया और हरसंभव मदद का आश्वसन दिया है। प्रभारी निरीक्षक का कहना है कि किसी भी कीमत पर कानून व्यवस्था से किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। इस मानवीय और संवेदनशील मांग को गंभीरता से लिया जाएगा। अगर ज़रूरत पड़ी तो पुलिस कर्मियों की तैनाती भी की जाएगी।
समाज के लिए एक गहरा संदेश

प्रधान के पति जोगिंदर सिंह बिट्टू ने कहा कि यह घटना केवल एक परिवार की सुरक्षा का सवाल नहीं है। बल्कि समाज में बढ़ती असहनशीलता की ओर एक बड़ा इशारा है। क्या अब अपनी खुशियां मनाने के लिए भी हमें संगीनों के साये की जरूरत पड़ेगी। बहरहाल, पुलिस की इस मुस्तैदी का एक ही पवित्र मकसद है, कि पिता की पगड़ी सलामत रहे और बिना किसी विवाद के पूरे सम्मान के साथ बेटी की डोली विदा हो सके।
इसलिए हुआ था विवाद

मेहनत मजदूरी करने वाले दादा मानकचंद ने बताया कि नवंबर माह में उनके सबसे बड़े पुत्र रोहदास की पुत्री की बरात उत्तराखंड के रुद्रपुर शहर से आई थी। बरात में डीजे पर डांस करने को लेकर रंजिश रखने वाले कुछ व्यक्तियों से विवाद हो गया था। झगड़े के दौरान तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

मामला कोतवाली तक पहुंचा था और पुलिस ने दो लोगों का शांति भंग की आशंका में चालान भी किया था। अब उनके दूसरे पुत्र ओमवीर की पुत्री अमृता की बरात बलाचौर रोपड़ पंजाब से आ रही है। रंजिशन गांव के किसी व्यक्ति ने दूल्हा के परिवार को फोन के माध्यम से धमकाया है। उन्हें आशंका है कि, कहीं फिर से विवाद न हो जाए और कोई बड़ी अनहोनी न होने पाए।

  

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