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सुपरटेक ट्विन टावर मामले में 35 आरोपियों पर कार्रवाई की तैयारी, विजिलेंस ने नोएडा प्राधिकरण से मांगे जवाब

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लखनऊ विजिलेंस ने सुपरटेक ट्विन टावर जांच पूरी की। फोटो: आर्काइव



कुंदन तिवारी, जागरण नोएडा। सुपरटेक ट्विन टावर प्रकरण एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है, क्योंकि शासन के निर्देश पर चल रही लखनऊ विजिलेंस की जांच पूरी हो चुकी है। अब 35 आरोपितों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गए है। विजिलेंस ने फिर से नोएडा प्राधिकरण में संपर्क साधा है, चार अक्टूबर 2021 के क्रम में दो अहम बिंदुओं पर जवाब तलब किया है।

इसका सीधा संबंध विभागीय जांच जुड़ा है। विजिलेंस ने मांगा है कि सुपरटेक बिल्डिंग से जुड़े मामलों में किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई थी। किन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच पूरी कर समाप्त कर लिया गया।

संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित कापी के साथ यह जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इन सवालों ने प्राधिकरण के भीतर एक बार फिर से हलचल बढ़ा दी है। दोनों बिंदुओं पर प्राधिकरण में जवाब तैयार करने का काम शुरू हो गया है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को ट्विन टावर गिराने के साथ-साथ इनके बनने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दिए थे। कोर्ट का आदेश आने के बाद प्रदेश सरकार ने इस मामले में चार अक्टूबर 2021 को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था।

टावर बनने के मामले में जांच रिपोर्ट में 26 अधिकारियों के अलावा सुपरटेक के चार निदेशकों और दो आर्किटेक्ट कंपनियों पर लापरवाही तय की थी। इसके बाद नोएडा प्राधिकरण नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक वैभव गुप्ता की शिकायत पर लखनऊ विजिलेंस में 30 आरोपित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

इसके अलावा जांच टीम ने 11 विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इस प्रकरण में दोषी माना था। इनकी विभागीय जांच कराने को कहा गया था। यह जांच नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने पूरी कर 23 मार्च 2023 शासन के समक्ष प्रस्तुत कर दी है। तीन फरवरी को लखनऊ से विजिलेंस टीम नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंची थी।

टीम ने नोडल अधिकारी से संपर्क कर ट्विन टावर ध्वस्तीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज तलब किए थे। इनमें प्रकरण में तैयार कार्यवृत योजना का विस्तृत ब्योरा,ध्वस्तीकरण से संबंधित जारी आदेश पत्र जैसे दस्तावेज शामिल रहे, लेकिन शुक्रवार की देर शाम विजिलेंस ने दो अहम बिंदुओं पर नोएडा प्राधिकरण से जवाब तलब किया है, जिनका सीधा संबंध विभागीय जांच से है।

कहा है कि सुपरटेक बिल्डिंग से जुड़े मामलों में किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई थी, किन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच पूरी कर समाप्त कर दी गई, संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित कापी उपलब्ध कराई जाए।

शासन को प्रस्तुत की गई 11 अधिकारी व कर्मचारियों की रिपोर्ट को ग्रेटर नोएडा से मंगवाकर नए सिरे से इसका सत्यापन करवा विजिलेंस के लिए रिपोर्ट प्राधिकरण में तैयार कराई जा रही है।

इसमें नियोजन विभाग के तत्कालीन प्रबंधक मुकेश गोयल, वरिष्ठ प्रबंधक ऋतुराज व्यास, सहायक नगर नियोजक विमला व एके मिश्रा, सहायक वास्तुविद प्रवीण श्रीवास्वत, प्लानिंग असिस्टेंट अनीता, विधि सलाहकार राजेश कुमार, विधि अधिकारी ज्ञान सिंह, परियोजना अभियंता एससी त्यागी व बाबूराम शामिल है।

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