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टीनएजर्स को सुधारने के लिए डांट नहीं; ये खास तरीका अपनाएं, बच्चा खुद मानेगा आपकी हर बात

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किशोरावस्था में बच्चों को संभालने के लिए माता-पिता के लिए खास टिप्स (Picture Credit- AI Generated)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। किशोरावस्था जीवन का वह दौर है जब बच्चे न सिर्फ शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी कई बदलावों से गुजरते हैं। इस उम्र में वे खुद को स्वतंत्र समझने लगते हैं और अक्सर परंपरागत नियम-कायदे उन्हें बंधन जैसे लगते हैं।  

पहले के समय में बच्चे सजा से डरकर अपनी गलतियां सुधार लेते थे, लेकिन आज की पीढ़ी अधिक आत्मनिर्भर और जिद्दी हो गई है। ऐसे में सख्ती या दंड देना उनकी सोच को और विद्रोही बना सकता है। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को समझदारी और प्यार के साथ सही दिशा दिखाएं। इसलिए आइए जानते हैं कुछ कारगर टिप्स के बारे में-
दोस्ताना रिश्ता बनाएं

किशोर बच्चों से केवल माता-पिता जैसा व्यवहार न करें, बल्कि एक अच्छे दोस्त बनें। जब वे आपको दोस्त समझेंगे तो अपनी प्रॉब्लम्स और गलतियां छिपाएंगे नहीं,बल्कि खुलकर साझा करेंगे।
सुनना और समझना सीखें

अक्सर बड़े सिर्फ आदेश देना जानते हैं। लेकिन किशोरों को यह महसूस कराना जरूरी है कि उनकी राय भी मायने रखती है। जब आप उनकी भावनाएं ध्यान से सुनेंगे तो वे खुद भी आपको समझने लगेंगे।
नियमों के साथ आजादी दें

सिर्फ “मत करो” कहने से बच्चा और जिद्दी हो जाता है। उन्हें कुछ हद तक आजादी दें, लेकिन उसके साथ नियम और जिम्मेदारी भी जोड़ें। इससे वे स्वतंत्रता का सही उपयोग करना सीखते हैं।
खुद उदाहरण प्रस्तुत करें

किशोर बच्चे सबसे ज्यादा सीखते हैं घर के माहौल से। अगर आप खुद अनुशासित, ईमानदार और पॉजिटिव रहेंगे तो वे भी वैसा ही व्यवहार अपनाएंगे। केवल उपदेश देना काफी नहीं आचरण में दिखाना भी जरूरी है।
इंट्रेस्ट और टैलेंट को पहचानें

किशोरों की एनर्जी को सही दिशा देने का सबसे अच्छा तरीका है उनकी रुचियों को बढ़ावा देना। चाहे खेल हो, म्यूजिक हो या पढ़ाई, उन्हें प्रोत्साहन दें जिस वे व्यर्थ संगति से बचें और खुद का सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ाएं।
सही मित्र मंडली चुनने में मार्गदर्शन दें

इस उम्र में दोस्ती का प्रभाव सबसे गहरा होता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के दोस्तों को जानें, उनके साथ बातचीत करें और सही दिशा में उन्हें प्रेरित करें, लेकिन दबाव न डालें।
जिम्मेदारी देना शुरू करें

बच्चों को घर के छोटे-छोटे काम और फैसले लेने की जिम्मेदारी दें। जब वे अपने निर्णयों के परिणाम समझेंगे तो उनमें आत्मनिर्भरता और मेच्योरिटी आएगी।
तारीफ और प्रोत्साहन न भूलें

केवल गलतियों पर डांटने की बजाय जब वे सही कदम उठाएं तो उनकी खुलकर तारीफ करें। यह उन्हें और बेहतर बनने की प्रेरणा देता है और पॉजिटिव एटमॉस्फियर तैयार करता है।

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