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पटना हाईकोर्ट में फिर रचा गया इतिहास।
प्रत्यूष प्रताप सिंह, पटना। पटना हाई कोर्ट में न्यायिक कार्यवाही का एक असाधारण दृश्य उस समय देखने को मिला, जब न्यायाधीश आरपी मिश्रा की एकलपीठ ने उत्पाद एवं मद्य निषेध अधिनियम से जुड़े 510 नियमित जमानत मामलों की सुनवाई कर उन्हें निस्तारित किया।
यह कार्यवाही न केवल संख्या की दृष्टि से, बल्कि अभूतपूर्व गति के कारण भी चर्चा का विषय बनी रही। न्यायाधीश मिश्रा ने लगभग प्रत्येक मामले का औसतन 30 सेकंड में निपटारा किया।
इतनी कम अवधि में सुनवाई और आदेश पारित करने की यह प्रक्रिया पटना हाई कोर्ट के न्यायिक इतिहास में एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है।
90 प्रतिशत से ज्यादा मामले स्वीकृत
उल्लेखनीय है कि एकलपीठ ने करीब 90 प्रतिशत से ज़्यादा जमानती मामलों को स्वीकृत किया। अधिवक्ताओं और वादी के लिए यह दृश्य आश्चर्यजनक होने के साथ-साथ राहत देने वाला भी रहा।
जमानत याचिकाओं में अधिकतर मामले बिहार में लागू मद्य निषेध कानून से जुड़े थे, जिनमें लंबे समय से सुनवाई का इंतजार किया जा रहा था।
न्यायालय ने संक्षिप्त लेकिन सटीक सुनवाई करते हुए प्रकरणों की प्रकृति, आरोपों और पूर्व आदेशों को ध्यान में रखकर फैसले सुनाए।
अधिवक्ताओं का कहना है कि इस तरह की त्वरित सुनवाई न्याय के त्वरित वितरण का बेहतरीन उदाहरण है। कई अधिवक्ताओं और उनके मुवक्किलों ने इसे न्यायपालिका की सकारात्मक सोच बताया।
कहा कि इससे न केवल अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ कम होगा, बल्कि आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा।
न्यायाधीश आरपी मिश्रा की यह कार्यशैली त्वरित, प्रभावी और व्यावहारिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। |
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