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वाराणसी में चाइनीज मांझे की चपेट में आने से राष्ट्रीय पक्षी मोर की दर्दनाक मौत, हुआ पोस्टमार्टम

LHC0088 2025-12-21 21:07:31 views 960
  

मोर की मौत के बाद चाइनीज मंझे की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग लोगों ने की है।



जागरण संवाददाता, वाराणसी (बड़ागांव)। विकास खंड बड़ागांव के ग्राम सभा कनियर में रविवार को चाइनीज मंझे की चपेट में आने से राष्ट्रीय पक्षी मोर की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना ग्रामीणों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

ग्रामीणों के अनुसार, मोर उड़ते समय प्रतिबंधित चाइनीज मंझे में फंस गया, जिससे वह उड़ नहीं पाया। इसके बाद, वह पास में लगे बिजली के ट्रांसफार्मर की चपेट में आकर नीचे गिर पड़ा। गिरने के बाद, कुत्तों के एक झुंड ने उस पर हमला कर दिया। इस स्थिति को देखकर गांव के गृजेश मिश्रा (गिज्जू) और हितेश मिश्रा ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर को कुत्तों के हमले से बचाया। लेकिन तब तक मोर गंभीर रूप से घायल हो चुका था।

गांव के लोगों ने मोर को गंगाजल पिलाने के बाद वन विभाग को सूचना दी। हालांकि, जब तक वन विभाग के लोग मौके पर पहुंचे, तब तक मोर ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने ग्रामीणों को गहरे सदमे में डाल दिया है और उन्होंने चाइनीज मंझे की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

सूचना मिलने पर वन विभाग के रेंजर पंकज कुमार सिंह, दरोगा अमित श्रीवास्तव और सिपाही सतेंद्र पाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने मोर के शव को कब्जे में लिया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद मोर का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया जाएगा।

यह घटना न केवल मोर की मौत का कारण बनी, बल्कि यह चाइनीज मंझे के उपयोग के खतरों को भी उजागर करती है। चाइनीज मंझा, जो कि एक प्रकार का पतंग उड़ाने का मजबूत धागा है, लेक‍िन उसके उपयोग से न केवल पक्षियों को नुकसान होता है, बल्कि यह मानव जीवन के लिए भी खतरा बन सकता है।

ग्रामीणों ने इस घटना के बाद एकजुट होकर चाइनीज मंझे के खिलाफ आवाज उठाई है। उनका कहना है कि इस प्रकार के मंझे की बिक्री पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। चाइनीज मंझे के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग केवल एक पक्षी की मौत के संदर्भ में नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।

यह घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि हमें अपने आसपास के जीव-जंतुओं की सुरक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए और किसी भी प्रकार के हानिकारक मंझों के उपयोग से बचना चाहिए।इस प्रकार की घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि हम अपने पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति कितने जिम्मेदार हैं।
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