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Jharkhand: अस्पताल से 4 माह के बच्चे का शव थैले में क्यों ले गया पिता? SDO की जांच रिपोर्ट आई सामने

Chikheang 2025-12-21 14:06:40 views 524
  

4 माह के बेटे का शव लेकर घर पहुंचा पिता। फाइल फोटो  



जागरण संवाददाता, चाईबासा। बेबस पिता द्वारा सदर अस्पताल चाईबासा से बच्चे का शव थैले में भरकर बस से ले जाने की घटना को उपायुक्त चंदन कुमार ने गंभीरता से लिया है।

उन्होंने सदर अनुमंडल पदाधिकारी संदीप अनुरोग टोपनो को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। एसडीओ ने सदर अस्पताल पहुंचकर जांच की व रिपोर्ट उपायुक्त को सौंप दी है।

रिपोर्ट के अनुसार मृत बच्चा चार साल का नहीं, बल्कि मात्र चार माह का शिशु था। मृतक की पहचान कृष्ण चातोम्बा के रूप में हुई है, जो नोवामुंडी थाना क्षेत्र के बालजोड़ी गांव का निवासी था।

शिशु को 18 दिसंबर की शाम 5:15 बजे बुखार और दस्त की शिकायत पर सदर अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कराया गया था। जांच में बच्चा मलेरिया पाजिटिव पाया गया था। बेहतर इलाज को शिशु को एमजीएम जमशेदपुर रेफर किया गया था, पिता ने बाहर ले जाने से इनकार कर दिया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इलाज के दौरान 19 दिसंबर को 1:15 बजे बच्चे की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने शव वाहन की व्यवस्था करने का प्रयास किया। जांच में पता चला कि एक वाहन मनोहरपुर में था, जिसे लौटने में करीब तीन घंटे का समय लगता, जबकि दूसरा वाहन दुर्घटनाग्रस्त था।

पिता से शव वाहन के आने तक इंतजार करने को कहा गया। शाम 4:40 बजे शव वाहन अस्पताल पहुंचा, लेकिन तब तक पिता शव लेकर निकल चुका था। नर्सों ने बताया कि उस दिन पीडियाट्रिक वार्ड में 33 बच्चे भर्ती थे और केवल दो नर्सें ड्यूटी पर थीं।

इस हड़बड़ी और अव्यवस्था के बीच पिता शव को थैले में डालकर निकल गया। जांच में यह भी सामने आया कि पिता के पास फोन नहीं था, जिसके कारण उससे संपर्क नहीं हो सका।
पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने बंधाया ढांढस

पैसों के अभाव में एक पिता द्वारा अपने मासूम पुत्र के शव को थैले में भरकर घर ले जाने की हृदयविदारक घटना के बाद जनप्रतिनिधि सक्रिय हो गए हैं। शनिवार सुबह पूर्व सांसद गीता कोड़ा नोवामुंडी प्रखंड के बड़ा बालजोड़ी गांव पहुंची और पीड़ित पिता डिंबा चातोम्बा एवं उनके परिवार से मुलाकात की।

गीता कोड़ा ने शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया और आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया। डिंबा चातोम्बा ने बताया कि जब अस्पताल प्रशासन ने बेटे के शव को घर ले जाने के लिए कहा, तो वह पूरी तरह बेबस थे।

उनके पास केवल 100 रुपये थे, जिनमें से 20 रुपये का प्लास्टिक थैला खरीदा और शव को उसमें रखकर बस से यात्रा की। बाकी 80 रुपये बस के भाड़े में खर्च हो गए। किसी तरह भूखे-प्यासे वह नोवामुंडी पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने मदद कर उन्हें घर पहुंचाया। शनिवार को शिशु का अंतिम संस्कार विधिपूर्वक किया गया।
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